Pitru Paksha

शुरू हो गया पितृपक्ष, क्या करें और क्या नहीं, जानें…

इस बार पितृपक्ष में श्राद्ध के लिए लोगों को 15 नहीं बल्कि 14 दिन ही मिल रहे हैं। आपको बता दें जो कार्य पितरों के लिए…

इस बार पितृपक्ष में श्राद्ध के लिए लोगों को 15 नहीं बल्कि 14 दिन ही मिल रहे हैं। आपको बता दें जो कार्य पितरों के लिए किये जाते हैं वह श्राद्ध कहलाते हैं। श्राद्ध ही पितरों का यज्ञ कहलाता है। देव ऋण ऋषि ऋण और पितृ ऋण इनमें से श्राद्ध की क्रिया से पितरों का पितृ ऋण उतारा जाता है।

पितृपक्ष का प्रारंभ 6 सितंबर को हो रहा है और 19 सितंबर को समाप्त होगा। इस बीच अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए आप क्या करें, किन बातों का ख्याल रखें और क्या ना करें, आइये जानते हैं।

पितृपक्ष में क्या न करें

पितृपक्ष के दौरान कुछ काम वर्जित होते हैं। मान्यता है कि इन्हें करने से पितृ नाराज होते हैं और श्राप भी दे सकते हैं…

1. सूर्य के रहते दिन के समय में कभी न सोएं।

2. पितृपक्ष में प्रणय प्रसंग से बचें।

3. पान का सेवन कदापि न करें।

4. पितृपक्ष में लहसुन प्याज से बना भोजन न करें।

5. कांच के बर्तनों का इस्तेमाल न करें

7. मांस और मदिरापान पितृपक्ष में वर्जित है।

8. तांबूल अर्थात तंबाकू युक्त किसी भी पदार्थ का सेवन न करें।

9. शुभ कार्य जैसे की विवाह, गृहप्रवेश से बचें।

10. पुरुष वर्ग दाड़ी तथा बाल न कटवाएं।

पितृपक्ष में क्या कार्य करें

पितृपक्ष के दौरान पितरों को खुश करने के लिए और उनका आर्शीवाद पाने के लिए ये करना चाहिए…

1. सूर्योदय से पहले जागने का प्रयास करें।

2. जमीन पर गद्दा लगाकर सोएं।

3. तुलसीपत्र का नित्य सेवन करें।

5. शुद्ध घी में बने पकवान ही पितृ निमित करें।

6. तेज बोले तथा गालीगलौज करने से बचें।

7. सूती तथा धुले हुए कपड़े पहनें।

8. घर की दक्षिण दिशा में नित्य तेल का दीपक करें।

9. सौंदर्य प्रसाधनों का कम से कम इस्तेमाल करें।

श्राद्ध करने से खुश होते हैं पितर

मान्यता है कि पितृपक्ष में पितर धरती पर भ्रमण कर अपने परिजनों को देखते हैं। इन दिनों को कनागत भी कहा जाता है। पितरों की तृप्ति के लिए श्रद्धा से किया गया तर्पण, पिंड दान अर्थात पिंड रूप में पितरों को दिया गया भोजन, जल को ही श्राद्ध कहते हैं। हिंदू शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में तर्पण व श्राद्ध करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिससे घर में सुख शांति व समृद्धि बनी रहती है।

सर्व पितृ मोक्ष तर्पण अमावस्या 19 सितंबर को

सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या 19 सितंबर को है, जो अगले दिन 20 को दोपहर 11.15 बजे तक रहेगी। मान्यता है कि पितृ पक्ष से जुड़े कर्मकांड दोपहर में किए जाते हैं, इस वजह से 19 को ही पितृ मोक्ष अमावस्या मनाई जाएगी, अगले दिन इसे स्नान-दान की अमावस्या माना जाएगा।

द्वादशी व त्रयोदशी का श्राद्ध 17 सितंबर को

वैदिक विद्वानों के अनुसार इस बार द्वादशी और त्रयोदशी का श्राद्ध एक ही दिन 17 सितंबर को होगा, क्योंकि 18 सितंबर को त्रयोदशी तिथि अपराह्न प्रारंभ होने से पूर्व ही समाप्त हो जाती है। इससे इस दिन यह अपराह्न व्यापिनी नहीं है। इस तिथि त्रयोदशी का यह श्राद्ध 17 सितंबर को द्वादशी श्राद्ध वाले दिन ही होगा।

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