News Flash
rangoli

दिवाली पर रंगोली का महत्व

कार्तिक मास की अमावस्या पर दिवाली का पर्व विश्वभर में धूम-धाम से मनाया जाएगा। दिवाली पर रंगोली का महत्व बहुत अधिक होता है, दिवाली के दिन घर में रंगोली इसलिए बनाई जाती है ताकि मां लक्ष्मी का घर में आगमन हो…

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर दिवाली पर रंगोली किसलिए बनाई जाती है। साथ ही माता लक्ष्मी के पदचिन्हों का महत्व भी बताएंगे। रंगोली को त्योहार, व्रत, पूजा, उत्सव, विवाह आदि शुभ अवसरों पर बनाया जाता है। रंगोली हमेशा लाल गेरू, चावल, आटा या सूखे और प्राकृतिक रंगों से बनाई जाती है। अब कुछ घरों में रंगोली पेंट से भी बनाई जाने लगी है।

दिवाली पर रंगोली का महत्व

रंगोली में लोग साधारण चित्र और आकृतियां बनाते हैं या फिर देवी-देवताओं की आकृतियां। रंगोली में स्वास्तिक, कमल का फूल, लक्ष्मी जी के पदचिन्ह भी बनाए जाते हैं। खासतौर पर दिवाली पर तो लक्ष्मी जी के पैर अवश्य बनाए जाते हैं।1

रंगोली के ये चिन्ह समृद्धि और मंगलकामना का संकेत हैं। दिवाली पर घरों में लक्ष्मी पैर उकेरना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि दिवाली के दिन मां लक्ष्मी सबके घरों में विचरण करती हैं। इसलिए लक्ष्मी के पैरों को घरों में माता के विचरण के तौर पर देखा जाता है। घर की महिलाएं बड़े प्रेम के साथ इस भावना से रंगोली बनाती हैं कि यह भी ईश्वर की पूजा है। इसीलिए घरों, देवालयों में हर दिन रंगोली बनाई जाती है।

कहां से शुरू हुई रंगोली बनाने की परंपरा कथा

रंगोली शब्द संस्कृत के एक शब्द ‘रंगावली’ से लिया गया है। इसे अल्पना भी कहा जाता है। भारत में इसे सिर्फ त्योहारों पर ही नहीं, बल्कि शुभ अवसरों, पूजा आदि पर भी बनाया जाता है। इससे जहां आने वाले मेहमानों का स्वागत होता है, वहीं भगवान के प्रसन्न होने की कल्पना भी की जाती है।

कथा

रंगोली के बारे में एक प्राचीन कथा है। एक बार शंकर जी हिमालय दर्शन के लिए चल पड़े। जाते समय पार्वती जी से कहा कि जब मैं घर वापिस लौटूं तो मुझे घर और आंगन मन को प्रसन्न करने वाला मिलना चाहिए। अगर ऐसा न हुआ तो मैं फिर से हिमालय लौट जाऊंगा। यह सुन कर माता पार्वती सोच में पड़ गईं और शंकर जी हिमालय की ओर चले गए।

पार्वती जी ने घर में साफ-सफाई की और उसे स्वच्छ-सुंदर बनाने के लिए पूरा आंगन गोबर से लीपा भी। घर अभी पूरी तरह से सूखा भी नहीं था कि शंकर भगवान के आने की सूचना उनके पास पहुंची। पार्वती जी फूल हाथ में लिए उनके स्वागत के लिए जल्दी-जल्दी चलने के कारण वहीं फिसल गईं और उनके महावर लगे पैरों की सुंदर आकृति की छाप वहां बन गई। लाल रंग के महावर पर गिरे फूलों ने वहां का दृश्य अद्भुत बना दिया।

तभी भगवान शंकर वहां आ पहुंचे और उसे देख कर मंत्रमुग्ध हो उठे। बड़ी प्रसन्नता से उन्होंने कहा कि जिन-जिन घरों में रंगोली से सुंदरता उत्पन्न होगी, वहां-वहां मेरा वास रहेगा और हर प्रकार की समृद्धि हमेशा रहेगी।

यह भी पढ़ें – प्रेरक प्रसंग – कांटे का टूटा अहंकार

Comments

Coming soon

Career Counsling

Get free career counsling and pursue your dreams