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shani amavasya

शनि अमावस्या के दिन श्री शनिदेव की आराधना करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं

शनैश्चरी अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। जिन व्यक्तियों की कुंडली में पितृदोष हो, उन्हें इस दिन दान इत्यादि विशेष कर्म करने चाहिए। यदि पितरों का प्रकोप न हो तो भी इस दिन किया गया श्राद्ध आने वाले समय में मनुष्य को हर क्षेत्र में सफलता प्रदान करता है, क्योंकि शनिदेव की अनुकंपा से पितरों का उद्धार बड़ी सहजता से हो जाता है।

शनि अमावस्या के दिन श्री शनिदेव की आराधना करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। 4 मई, शनिवार के दिन शनि अमावस्या मनाई जाएगी, यह पितृकार्येषु अमावस्या के रूप में भी जानी जाती है। श्री शनिदेव भाग्यविधाता हैं, यदि निश्छल भाव से शनिदेव का नाम लिया जाए तो व्यक्ति के सभी कष्टï दूर हो जाते हैं। इस अमावस्या का विशेष महत्व है और अमावस्या अगर शनिवार के दिन ही पड़े तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

शनिदेव को अमावस्या अधिक प्रिय है। शनिदेव की कृपा का पात्र बनने के लिए शनैश्चरी अमावस्या को सभी को विधिवत आराधना करनी चाहिए। भविष्यपुराण के अनुसार शनिश्चरी अमावस्या शनिदेव को अधिक प्रिय रहती है।

शनि अमावस्या पूजन : पवित्र नदी के जल से या नदी में स्नान कर शनिदेव का आह्वान और दर्शन करना चाहिए। शनिदेव को नीले पुष्प, बेल पत्र, अक्षत अर्पण करें। शनिदेव को प्रसन्न करने हेतु शनि मंत्र…

-ॐ शं शनैश्चराय नम:
-ॐप्रां प्रीं प्रौं शं शनैश्चराय नम:

का जाप करना चाहिए। इस दिन सरसों के तेल, उड़द, काले तिल, कुलथी, गुड़ शनियंत्र और शनि संबंधी समस्त पूजन सामग्री को शनिदेव पर अर्पित करना चाहिए और शनिदेव का तेल से अभिषेक करना चाहिए। शनि अमावस्या के दिन शनि चालीसा, हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ अवश्य करना चाहिए।

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