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mauni amavasya

मुनि शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति हुई

मौनी अमावस्या 4 फरवरी को है। माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। इस दिन मौन रहना चाहिए। मुनि शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति हुई है। इसलिए इस व्रत को मौन धारण करके समापन करने वाले को मुनि पद की प्राप्ति होती है। यही नहीं इस दिन मौन रहकर

यमुना या गंगा स्नान करना चाहिए…

कथा :

कांचीपुरी में देवस्वामी नामक एक ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी का नाम धनवती था। उनके सात पुत्र तथा एक पुत्री थी। पुत्री का नाम गुणवती था। ब्राह्मण ने सातों पुत्रों का विवाह करके बेटी के लिए वर खोजने अपने सबसे बड़े पुत्र को भेजा। उसी दौरान किसी पंडित ने पुत्री की जन्मकुंडली देखी और बताया-‘सप्तपदी होते-होते यह कन्या विधवा हो जाएगी।’ तब उस ब्राह्मण ने पंडित से पूछा- ‘पुत्री के इस वैधव्य दोष का निवारण कैसे होगा?’ पंडित ने बताया-‘सोमा का पूजन करने से वैधव्य दोष दूर होगा।’ फिर सोमा का परिचय देते हुए उसने बताया-‘वह एक धोबिन है। उसका निवास स्थान सिंहल द्वीप है। उसे जैसे-तैसे प्रसन्न करो और गुणवती के विवाह से पूर्व उसे यहां बुला लो।’

तब देवस्वामी का सबसे छोटा लड़का बहन को अपने साथ लेकर सिंहल द्वीप जाने के लिए सागरतट पर चला गया। सागर पार करने की चिंता में दोनों एक वृक्ष की छाया में बैठ गए। उस पेड़ पर एक घोंसले में गिद्ध का परिवार रहता था। उस समय घोंसले में सिर्फ गिद्ध के बच्चे थे। गिद्ध के बच्चे भाई-बहन के क्रिया-कलापों को देख रहे थे। सायंकाल के समय उन गिद्ध के बच्चों की मां आई तो उन्होंने भोजन नहीं किया। वे मां से बोले- ‘नीचे दो प्राणी सुबह से भूखे-प्यासे बैठे हैं। जब तक वे कुछ नहीं खा लेते, तब तक हम भी कुछ नहीं खाएंगे।’ तब दया और ममता के वशीभूत गिद्ध माता उनके पास आई और बोली-‘मैंने आपकी इच्छाओं को जान लिया है।

इस वन में जो भी फल-फूल कंद-मूल मिलेगा, मैं ले आती हूं। आप भोजन कर लीजिए। मैं प्रात:काल आपको सागर पार कराकर सिंहल द्वीप की सीमा के पास पहुंचा दूंगी।’ और वे दोनों भाई-बहन गिद्ध माता की सहायता से सोमा के यहां जा पहुंचे। वे नित्य प्रात: उठकर सोमा का घर झाड़कर लीप देते थे। एक दिन सोमा ने अपनी बहुओं से पूछा-‘हमारे घर कौन बुहारता है, कौन लीपता-पोतता है?’ सबने कहा-‘हमारे सिवाय और कौन बाहर से इस काम को करने आएगा?’ किंतु सोमा को उनकी बातों पर विश्वास नहीं हुआ। एक दिन उसने रहस्य जानना चाहा। वह सारी रात जागी और सबकुछ प्रत्यक्ष देखकर जान गई।

सोमा का उन बहन-भाई से वार्तालाप हुआ। भाई ने सोमा को बहन संबंधी सारी बात बता दी। सोमा ने उनकी श्रम-साधना तथा सेवा से प्रसन्न होकर उचित समय पर उनके घर पहुंचने का वचन देकर कन्या के वैधव्य दोष निवारण का आश्वासन दे दिया। मगर भाई ने उससे अपने साथ चलने का आग्रह किया। आग्रह करने पर सोमा उनके साथ चल दी। चलते समय सोमा ने बहुओं से कहा-‘मेरी अनुपस्थिति में यदि किसी का देहांत हो जाए तो उसके शरीर को नष्ट मत करना। मेरा इंतजार करना।’ और फिर सोमा बहन-भाई के साथ कांचीपुरी पहुंच गई। दूसरे दिन गुणवती के विवाह का कार्यक्रम तय हो गया।

सप्तपदी होते ही उसका पति मर गया। सोमा ने तुरंत अपने संचित पुण्यों का फल गुणवती को प्रदान कर दिया। तुरंत ही उसका पति जीवित हो उठा। सोमा उन्हें आशीर्वाद देकर अपने घर चली गई। उधर गुणवती को पुण्य-फल देने से सोमा के पुत्र, जामाता तथा पति की मृत्यु हो गई। सोमा ने पुण्य फल संचित करने के लिए मार्ग में अश्वत्थ (पीपल) वृक्ष की छाया में विष्णुजी का पूजन करके 108 परिक्रमाएं कीं। इसके पूर्ण होने पर उसके परिवार के मृतक जन जीवित हो उठे। निष्काम भाव से सेवा का फल मधुर होता है, इस व्रत का यही लक्ष्य है।

इस दिन ये उपाय करें

मौनी अमावस्या के दिन सूर्य को अघ्र्य देने का बड़ा महत्व है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत हो जाएं और ठीक सूर्योदय के समय सूर्यदेव को ताजे जल से अघ्र्य दें। इससे दरिद्रता दूर होती है और धन का आगमन बढ़ता है।

मौनी अमावस्या के दिन सायं के समय तुलसी के पौधे के समीप घी का दीपक लगाएं और 108 परिक्रमा करें। इससे जीवन में सात्विकता आने के साथ ही समस्त प्रकार के संकटों का नाश होता है।

जिन लोगों की जन्मकुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है। वे मौनी अमावस्या के दिन गाय को दही और चावल खिलाएं। इससे मानसिक शांति प्राप्त होने के साथ चंद्र से जुड़े दोष समाप्त होते हैं।

मौनी अमावस्या के दिन चांदी के नाग-नागिन की पूजा करें और सफेद पुष्पों के साथ इसे बहते जल में प्रवाहित करने से कालसर्प दोष, सर्प दोष आदि से मुक्ति मिलती है।

मौनी अमावस्या के दिन चीटियों को शक्कर मिला आटा खिलाएं। मछलियों को आटे की गोलियां खिलाएं और पक्षियों के लिए दाना-पानी का इंतजाम करने से धन की कमी नहीं रहती।

इस बार मौनी अमावस्या सोमवार को आ रही है इसलिए सोमवती अमावस्या का शुभ संयोग भी बन रहा है। इस दिन भगवान शिव का अभिषेक करने से अविवाहितों के विवाह की बाधा दूर होती है।

मौनी अमावस्या के दिन शाम को घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक लगाएं। बत्ती में रूई के स्थान पर लाल रंग के धागे का प्रयोग करें। संभव हो तो दीपक में केसर की एक-दो पत्तियां डाल दें। इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में धन का आगमन बढ़ता है।

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