News Flash
holika dahan

होलिका दहन

हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहार होली को दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन महिलाएं होलिका की पूजा-अर्चना करती हैं। रंग वाली होली से पहले होलिका दहन किया जाता है, इसे बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना गया है। इस दिन भगवान ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी। होली की पूजा रंग वाली होली के पहले दिन से ही शुरू हो जाती है।

पूजा करने में पूरी सावधानी रखनी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि जो महिलाएं इस व्रत को पूरे विधि-विधान से करती हैं, उनके पुत्र को जीवन में कभी किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। यदि आपके पुत्र को कोई परेशानी है तो आपके इस व्रत को करने से उसकी परेशानियां दूर हो जाएंगी।

होलिका दहन के लिए हर चौराहे व गली-मोहल्ले में गूलरी, कंडों व लकडिय़ों से होली सजाई जाती है। लकड़ी और कंडों की होली के साथ सूखी हुई घास लगाकर होलिका खड़ी करके उसका पूजन करने से पहले हाथ में फूल, सुपारी और पैसा लेकर पूजन कर जल को होलिका के पास छोड़ दें। इसके बाद अक्षत, चंदन, रोली, हल्दी, गुलाल, फूल तथा गूलरी की माला पहनाएं।

इसके बाद होलिका की तीन परिक्रमा करते हुए नारियल, गेहूं की बाली तथा गन्ने को भून कर इसका प्रसाद सभी को वितरित किया जाता है। भारतीय संस्कृति में होलिका दहन को ही होली पूजा माना जाता है, जो एक रस्म होती है। होलिका दहन शुभ मुहूर्त में ही किया जाना अच्छा रहता है।

पुत्र को बुरी शक्तियों से बचाने के लिए कामना

होली पूजन से हर प्रकार के डर पर विजय प्राप्त होती है। इस पूजन से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। माताएं पुत्र को बुरी शक्तियों से बचाने और मंगल कामना के लिए यह पूजा करती हैं। व्रत को होलिका दहन के बाद खोला जाता है। व्रत खोलने पर ईश्वर का ध्यान कर सुख-समृद्धि की कामना करें। पूजन करते समय आपका मुंह पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ होना चाहिए। पहले जल की बूंदों का छिड़काव अपने आसपास, पूजा की थाली और खुद पर करें। इसके बाद नरसिंह भगवान का स्मरण करते हुए उन्हें रोली, मौली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें। इसी प्रकार भक्त प्रह्लाद का स्मरण करते हुए उन्हें रोली, मौली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।

इसके बाद बताशे और फूल चढ़ाएं। कुछ लोग होलिका को हल्दी, मेहंदी, गुलाल और नारियल भी चढ़ाते हैं। हाथ जोड़कर होलिका से परिवार की सुख-समृद्धि के लिए कामना करें। सूत के धागे को होलिका के चारों ओर घुमाते हुए तीन, पांच या सात बार लपेटते हुए चक्कर लगाएं। जहां आपका अंतिम चक्कर पूरा हो, वहां जल का लोटा खाली कर दें। उसके बाद होलिका दहन किया जाता है।

पुरुषों के माथे पर तिलक लगाया जाता है। होली जलने पर रोली-चावल चढ़ाकर सात बार अघ्र्य देकर सात परिक्रमा करनी चाहिए। इसके बाद साथ लाए गए हरे गेहूं या जौ और गन्ने को अग्नि में भून लें। होली की अग्नि थोड़ी सी अपने साथ घर ले आएं और होली की अग्नि से अपने घर में धूप दिखाएं।

Comments

Coming soon

Career Counsling

Get free career counsling and pursue your dreams


[recaptcha]