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bhagwat purana

शाहतलाई में भागवत पुराण कर रहे पंडित केशवानंद ने प्रवचन के दौरान कहा

हिमाचल दस्तक। शाहतलाई
श्रीमद्भागवत पुराण हिंदू समाज का सर्वाधिक आदरणीय पुराण है। यह बात शाहतलाई में चली कथा के छठे दिन मंगलवार को प्रवचन कर रहे पंडित श्री केशवानंद ने श्रोताओं से कहे। यह वैष्णव सम्प्रदाय का प्रमुख ग्रंथ है। इस ग्रंथ में वेदों, उपनिषदों तथा दर्शन शास्त्र के गूढ़ एवं रहस्यमय विषयों को अत्यंत सरलता के साथ निरुपित किया गया है।

इसे भारतीय धर्म और संस्कृति का विश्व कोष कहना अधिक समीचीन होगा। सैकड़ों वर्षों से यह पुराण हिंदू समाज की धार्मिक, सामाजिक और लौकिक मर्यादाओं की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता आ रहा हैं। आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि कलयुग में क्या-क्या घटित होगा। इस मौके पर इन्होंने श्री कृष्ण रुक्मणी, लीला विवाह का वृतांत भी सुनाया।

धर्म का मार्ग ही कलयुग में मनुष्य को मुक्ति दिला सकता है

कथा का श्रवण करते हुए पंडित केशवानंद ने बताया कि श्रीकृष्ण लीलाओं का जो विस्तृत वर्णन भागवत ग्रंथ में किया गया है, उसका उद्देश्य क्या केवल कृष्ण भक्तों की श्रद्धा बढ़ाना है या मनुष्य मात्र के लिए इसका कुछ संदेश है। तार्किक मन को विचित्र सी लगने वाली इन घटनाओं के वर्णन का उद्देश्य क्या ऐसे मन को अतिमानवीय पराशक्ति की रहस्यमयता से विमूढ़वत बना देना है।

अथवा उसे उसके तार्किक स्तर पर ही कुछ गहरा संदेश देना है। इस पर हमें विचार करना चाहिए। कथावाचक ने पंडाल में उपस्थित श्रोताओं को बताया कि जिस भी मनुष्य ने काम क्रोध, मोह, लोभ व अहंकार पर काबू पा लिया उसे मोक्ष प्राप्ति से कोई भी नहीं रोक सकता है लेकिन कलयुग में इन पर मनुष्य को नियंत्रण करना काफी कठिन है इसलिए हमें हो सके, तो इन पर काबू पाने के लिए प्रयास करना चाहिए क्योंकि धर्म का मार्ग ही कलयुग में मनुष्य को मुक्ति दिला सकता है।

श्रीमद् भागवत गीता का भी यही सार है जिसने उपरोक्त पांचो चीजों पर में से एकाध पर भी कलयुग में अपने जीवन पर अमल कर लिया तो उसके जीवन में निखार आएगा। मनुष्य को चाहिए कि उन्हें स्वयं वह आने वाले पीढ़ी को अपने धर्म ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए।

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