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बीसीसीआई तीन महीने में लेगी फैसला

  • बीसीसीआई ने 2013 में श्रीसंत पर लगाया था आजीवन प्रतिबंध
  • ट्रायल कोर्ट ने 2015 में श्रीसंत को बरी किया
  • 2017 में केरल हाईकोर्ट ने प्रतिबंध कर दिया था बहाल

नई दिल्ली
सुप्रीमकोर्ट ने शुक्रवार को 2013 में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की अनुशासनात्मक समिति के उस आदेश को रद कर दिया है, जिसमें क्रिकेटर एस श्रीसंत पर आजीवन प्रतिबंध लगाया गया था। अदालत ने बीसीसीआई की अनुशासनात्मक समिति से कहा है कि वह तीन महीने के भीतर श्रीसंत को दी जाने वाली सजा की अवधि को लेकर पुनर्विचार करे। जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस केएम जोसेफ वाली सुप्रीमकोर्ट की बेंच ने बीसीसीआई से कहा कि श्रीसंत को दी गई सजा की अवधि पर वह नए सिरे से फैसला ले।

वह यह काम तीन महीने के भीतर पूरा कर ले। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि उसके इस फैसले से दिल्ली हाई कोर्ट में श्रीसंत के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्रवाई के मामले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। दिल्ली पुलिस ने निचली अदालत के उस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में श्रीसंत समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया था।

2015 में निचली अदालत से बरी हुए थे तेज गेंदबाज

निचली अदालत ने 2015 में श्रीसंत को कथित स्पॉट फिक्सिंग में आपराधिक मामले से बरी कर दिया था। हालांकि अक्तूबर 2017 में केरल हाई कोर्ट ने श्रीसंत पर लगाए गए आजीवन प्रतिबंध को बहाल कर दिया। श्रीसंत ने सुप्रीमकोर्ट में हाई कोर्ट के उसी फैसले को चुनौती दी थी। श्रीसंत ने अपनी अर्जी में निचली अदालत के फैसला का हवाला देते हुए कहा है कि बीसीसीआई की ओर से उन पर लगाया गया आजीवन प्रतिबंध बहुत कठोर फैसला है। ऐसा भी कोई सुबूत नहीं है कि जिससे यह साबित हो पाए कि वे किसी अवैध गतिविध में लिप्त थे।

मैं मैदान पर वापसी करने को तैयार : श्रीसंत

सुप्रीमकोर्ट का फैसला आने के बाद श्रीसंत ने कहा कि सिलेक्शन वगैरह चयनकर्ताओं पर निर्भर है। अभी बहुत लाइफ बाकी है, तो जय माता दी। बहुत बार ऐसा हुआ है कि खिलाडिय़ों को इंजरी हुई है। मैं ऐसा सोचूंगा कि मेरे साथ बड़ी इंजरी थी। अगर लिएंडर पेस जैसे महान खिलाड़ी 40-45 की उम्र में खिताब जीत सकते हैं, तो मैं भी वापस खेल सकता हूं। क्रिकेट में भी आशीष नेहरा ने 38 साल की उम्र तक खेला, मैं भी अभी 36 साल का हूं। मेरी प्रैक्टिस जारी है। मैं मैदान पर लौटने को तैयार हूं।

मुझे अपना पक्ष रखने का मौका नहीं मिला : श्रीसंत

दिल्ली पुलिस ने मई 2013 में स्पॉट फिक्सिंग मामले में कथित संलिप्तता के चलते श्रीसंत को गिरफ्तार किया था। श्रीसंत तब आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेल रहे थे। उनके साथ उनकी टीम के साथी अंकित चह्वाण और अजीत चंदेलिया की भी गिरफ्तारी हुई थी। तीनों के खिलाफ महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में बीसीसीआई ने तीनों पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया। श्रीसंत ने सुप्रीमकोर्ट ने यह भी दलील दी थी कि बीसीसीआई की ओर से गठित जांच समिति ने उन्हें अपना पक्ष रखे बिना ही बोर्ड को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी थी।

सीओए की बैठक में करेंगे विचार : विनोद

इस मामले में बीसीसीआई की प्रशासकों की समिति (सीओए) के प्रमुख विनोद राय ने कहा कि मैंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बारे में सुना है। हमें आदेश की कॉपी मिलने की जरूरत है। हम निश्चित तौर पर सीओए की बैठक में इस मुद्दे को उठाएंगे। एंटी-डोपिंग पॉलिसी को लेकर सीओए की 18 मार्च को इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) के पदाधिकारियों के साथ एक बैठक होनी है। माना जा रहा है कि उस दिन बैठक में यह मामला भी उठ सकता है।

मैं उम्मीद करता हूं कि बीसीसीआई देश की उच्चतम न्यायालय द्वारा सुनाए गए फैसले का सम्मान कर मुझे कम से कम क्रिकेट मैदान पर वापसी की अनुमति दे। उम्मीद करता हूं कि अब कम से कम मैं स्कूल के क्रिकेट मैदान पर चल सकता हूं और वहां ट्रेनिंग कर सकता और कोई मुझे यह नहीं कहेगा कि मुझे इसकी अनुमति नहीं है। मैं उतना क्रिकेट खेलना चाहता हूं, जितना खेल सकता हूं। –एस श्रीसंत

  • 2007 टी-20 विश्व कप जीतने में टीम इंडिया में दिया था अहम योगदान
  • 2011 वन-डे विश्व कप जीतने वाली टीम के हिस्सा रहे थे श्रीसंत

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