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1.67 lakh children will be cremated.

डीसी प्रजापति ने तैयारियों पर अधिकारियों के साथ की बैठक , 19 वर्ष तक के बच्चों को स्कूलों में निशुल्क दवाई

राजीव भनोट, ऊना। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 1 मई को ऊना जिला के 1.67 लाख बच्चों को पेट के कीड़े मारने की दवा खिलाई जाएगी। यह जानकारी उपायुक्त राकेश कुमार प्रजापति ने दी। मंगलवार को डीसी जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। डीसी ने कहा कि एल्बेंडाजॉल एक सुरक्षित व असरदार दवा है, जो एक से 19 वर्ष के बच्चों को स्कूलों में निशुल्क दी जाएगी। आंगनबाड़ी केंद्रों में भी यह दवा बच्चों की दी जाएगी।

डीसी ने बताया कि बच्चों के पेट में कृमि संक्रमण के कारण उनके शारीरिक और दिमागी विकास में बाधा आती है, जिससे कुपोषण और खून की कमी (एनीमिया) हो जाती है। उन्होंने बताया कि पेट के कीड़े मारने के लिए कृमि नियंत्रण की दवा (एल्बेंडाजॉल) नियमित तौर पर लेने से जहां शरीर में पोषण का स्तर बेहतर होता है तो वहीं बच्चे की रोग प्रतिशोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद मिलती है। इसके अतिरिक्त न केवल बच्चे की कार्य क्षमता में सुधार आता है, बल्कि वातावरण में कृमि की संख्या कम होने से इसका लाभ समुदाय के अन्य सदस्यों को भी मिलता है।
उन्होंने बताया कि जिला के विभिन्न सरकारी व निजी शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ 1364 आंगनबाड़ी केंद्रों में एक वर्ष से लेकर 19 वर्ष तक के बच्चों व युवाओं को यह दवा संस्थान के अध्यापकों, आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं के सहयोग व निगरानी में खिलाई जाएगी। पांच वर्ष तक के बच्चों को यह दवा आंगनबाडी कार्यकर्ताओं के माध्यम से जबकि शिक्षण संस्थानों में संबंधित संस्थान के अध्यापकों की देखरेख में खिलाई जाएगी। जो बच्चे स्कूलों से बाहर होंगे उन्हें आशा वर्कर के माध्यम से यह दवा खिलाई जाएगी।
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमन कुमार शर्मा,जिला कार्यक्रम अधिकारी हेल्थ डॉ. सुखदीप सिंह सिद्धु, जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) सतनाम सिंह, उप-निदेशक प्रारंभिक शिक्षा संजय गुप्ता, डाइट प्रिंसिपल देवेंद्र चौहान, नगर परिषद ऊना की सीओ बबली, एमईआईओ कांता ठाकुर तथा स्वास्थ्य शिक्षक गोपाल कृष्ण के साथ-साथ अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

प्रवासी बच्चों को भी दी जाएगी दवा

उपायुक्त ने कहा कि बीएमओ के माध्यम से यह दवा सही समय पर संबंधित शिक्षण संस्थानों में पहुंचाना सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रवासी बच्चों को भी यह दवा खिलाई जाएगी। आशा वर्कर्स झुग्गी-झोंपडिय़ों में जाकर प्रवासियों को एल्बेंडाजोल दवा दें, ताकि वह भी स्वस्थ बन सकें।

क्या है कृमि संक्रमण

कृमि परजीवी होते हैं, जो जीवित रहने के लिए मनुष्य की आंत में रहते हैं। बच्चों में आम तौर पर तीन तरह के कृमि-राउंड, व्हिप और हुक कृमि पाए जाते हैं। यह कृमि नंगे पैर खेलने से, बिना हाथ धोए खाना खाने से, खुले में शौच करने से तथा साफ-सफाई न रखने से बच्चे के पेट में पहुंच सकते हैं। ऐसे में एल्बेंडाजोल की दवाई कृमि नियंत्रण में मददगार साबित होती है।

मतदान का संदेश भी पहुंचाएं

राकेश कुमार प्रजापति ने कहा कि घर-घर जाकर दवा पिलाने वाली आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ता लोकसभा चुनाव के लिए 19 मई को होने वाले मतदान के लिए भी मतदाताओं को प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि दवा खिलाने के साथ-साथ वह बच्चों के माता-पिता व परिवार के अन्य सदस्यों को मतदान का महत्व समझाएं और उन्हें वोट डालने के लिए प्रेरित करें।

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