road accident

सावधानी हटी और दुर्घटना घटी

-महेश तिवारी

सावधानी हटी और दुर्घटना घटी। इस युक्ति का कोई अर्थ नहीं रहा। सड़क पर सरपट दौड़ती गाडिय़ां और उससे भी तेज सरपट भागती मौत। यह कहानी हमारी सड़कें रच रही हैं। बेफिक्र, बेपरवाह रफ्तार की मदांधता में चूर देश का युवा और अन्य वर्ग अपने जिंदगी को मौत के घाट बगैर कीमत वसूल किए गंवा रहा है। न घर के अन्य सदस्यों की परवाह, न चिंता न फिक्र। वह पागल तो रफ्तार के आगे हुआ जा रहा है। आज के वैश्विक दौर में जिंदगी और कारोबार से तेज सड़कों पर मौत घूम रही है। इस रफ्तार के सौदागरों में देश की युवा पीढ़ी की अधिकता है।

Accidentआज का युवा सबसे ज्यादा मुसीबतों को इसलिए झेलता है क्योंकि उसकी आंखों पर आगे रहने का जो चश्मा चढ़ चुका है। वह उसका पीछा नहीं छोड़ रही। युवाओं की जान पर शेखी और शान हावी है। रफ्तार के जादूगर बनने निकलते हैं लेकिन यमराज का बुलावा पहले आ जाता है। हमारी युवा पीढ़ी अगर आज तक किसी चीज से अनभिज्ञ बनी है तो वह है नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी।

अब ऐसे में जो नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी नहीं समझ सकता वह अपने जिंदगी के अर्थ को क्या समझ सकता है। तमाम नियम-कायदे-कानून का निर्माण। फिर भी सड़क पर दौड़ती मौत पर अंकुश नहीं। फिर कमी मात्र सरकारी तंत्र की ही नहीं, कमी तो हमारे लोकशाही व्यवस्था की भी है जिसे नियम तोडऩे में मजा आता है। सड़क दुर्घटनाओं की प्रतिशत मौत में युवाओं की संख्या काफी अधिक है।

अगर 2016 की सरकारी रिपोर्ट में दुर्घटना के कम होने की बात की गई लेकिन मरने वालों की तादाद बढ़ी है। देश की सड़कें खून की आदी हो गई हैं। सरपट दौड़ती जिंदगी में मौत कब गले को चूम ले इसका पता नहीं। फिर भी सरकार सड़क दुर्घटनाओं पर काबू पाने के लिए अपनी तरफ से कटिबद्ध दिखती है।

देश में हर वर्ष लाखों लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं। केंद्र सरकार इसको लेकर सजग भी है। जिसका पता इससे पता चलता है कि जहां पिछले साल में सड़क हादसों में कमी आई थी वहीं इस साल हादसों के साथ मौत की संख्या में भी कमी आई है।

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