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शोध :  3.5 अरब साल पहले धरती के उपग्रह पर थी दूसरी दुनिया

एजेंसी। लंदन : क्या चांद पर कभी एलियनों का बसेरा हुआ करता था। वैज्ञानिकों के हालिया दावे को मानें तो ऐसा ही लगता है। उनका कहना है कि संभवत: उल्का पिंडों के ब्लास्ट के कारण एलियनों के रहने के अनुकूल वातावरण पैदा हुआ।

जब यह हुआ, तब का वातावरण संभवत: आज की तुलना ज्यादा रहने योग्य रहा होगा। ग्रहों पर शोध करने वाले दो वरिष्ठ वैज्ञानिकों के मुताबिक, संभवत: चांद पर चार अरब साल पहले जीवन जीने योग्य माहौल था। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह स्थिति संभवत: 3.5 अरब साल पहले ज्वालामुखी विस्फोट के कारण भी पैदा हुई होगी। उस वक्त चांद से बड़ी मात्रा में गर्म गैस रिस रहा था। जिस गैस के कारण सतह पर पानी तैयार हुआ।

वॉशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के एस्ट्रोबायॉलजिस्ट डिर्क शुल्ज-माकुच ने कहा कि अगर शुरुआती समय में चांद पर लंबे समय के लिए पानी और विशिष्ट वातावरणा था, तो हमें लगता है कि चांद की सतह पर अस्थायी रूप से जीवन जीने योग्य माहौल था शुल्ज ने यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के ग्रह विज्ञान और एस्ट्रोबायोलजी के प्रोफेसर इयान क्राफॉर्ड के साथ मिलकर यह पेपर तैयार किया है। माना जाता है कि चांद की सतह मैग्नेटिक फील्ड से कवर थी जिसने घातक गर्म हवा से किसी भी प्रकार के जीव की रक्षा की होगी।

डेढ़-दो दशकों में होगा संपर्क

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले एक डेढ़ दो दशकों में एलियन से पृथ्वीवासियों का या तो संपर्क हो पाएगा या उनसे मिलना संभव हो जाएगा। इंसान बरसों से एलियन की तलाश कर रहा है। कभी उसकी तलाश के लिए दूरबीन की मदद ली जाती है, तो कभी अंतरिक्ष में दूरबीन और यान भेजकर उसे तलाशा जाता रहा है। बहुत दिनों से धरती से रेडियो तरंगें भी भेजी जा रही हैं।

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