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prostate cancer

बीमारी के लिए जिम्मेदार है पीसीएसईएटी

बीजिंग। चीनी के वैज्ञानिकों ने प्रोस्टेट कैंसर के लिए जिम्मेदार एक जीन की पहचान की है, जिससे इस बीमारी का पता लगाने और उसका इलाज करने में नए तरीके का इस्तेमाल किया जा सकेगा। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने खबर दी है कि सुजहोउ इंस्ट्टियूट ऑफ बायोमेडिकल इंजीनियरिंग एंड टेक्नॉलोजी के वैज्ञानिकों ने पीसीएसईएटी नाम के एक नए बायोमार्कर की खोज की है।

शोध में सामने आया कि प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों में पीसीएसईएटी अधिक मात्रा में है जिससे संकेत मिला कि पीसीएसईएटी संभावित चिकित्सीय लक्ष्य हो सकता है। यह शोध मई में , बायोकेमिकल एंड बायोफिजिकल रिसर्च कम्यूनिकेशंस में प्रकाशित हुआ है। शोध के आधार पर वे प्रोस्टेट कैंसर का जल्दी पता लगा सकते हैं। इसके इलाज की लागत में कमी आ सकती है।

बाहर से सक्रिय होंगे शरीर में लगे उपकरण

बोस्टन। मानव शरीर के भीतर लगे उपकरणों को सक्रिय करने और उनके साथ वायरलेस तरीके से संवाद कायम करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक नया तरीका विकसित किया है। इस तरह दवाएं देने, आंतरिक स्थिति पर नजर रखने और रोगों के उपचार के नए तरीके की राह खुलती है। इन इम्प्लांट को रेडियो फ्रिक्वेंसी तरंगों के जरिए सक्रिय किया जाता है।

ये तरंगें मानव शरीर के उत्तकों के जरिए सुरक्षित रूप से आ-जा सकती हैं। अमेरिका में मैसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में असिस्टेंट प्रोफेसर फादेल आदिब ने बताया कि इन छोटे आरोपण उपकरणों में कोई बैटरी नहीं होती है, फिर भी शरीर से कुछ दूरी पर रहते हुए भी उनसे संपर्क साध सकते हैं।

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