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टेरर फंडिंग – अमेरिका की कोशिशों को झटका, एफटीएफ में नहीं बनी सहमति

वॉशिंगटन
अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को फंडिंग देने वाले देशों की लिस्ट में पाकिस्तान को शामिल किया जाएगा या नहीं, इसे लेकर अभी आखिरी फैसला नहीं हुआ है। हालांकि अमेरिका की कोशिशों को उस वक्त झटका लगा जब पाकिस्तान के तीन निकट सहयोगी देश चीन, सऊदी अरब और तुर्की उसके बचाव में उतर आए। अमेरिकी मीडिया की खबर में यह जानकारी दी गई है। पाकिस्तान ने इसे अपनी जीत की तरह लिया है, वहीं ट्रंप प्रशासन पेरिस में फाइनांशियल एक्शन टास्क फोर्स की मीटिंग में पर्दे के पीछे से काम कर रहा है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह पहली बार है, जब किसी मुद्दे पर सऊदी अरब और ट्रंप प्रशासन के बीच सहमति नहीं बन पाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सऊदी अरब, पाकिस्तान का साथ गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल की वजह से दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका अभी भी इस कोशिश में है कि एफएटीएफ इस पर कोई फैसला करे। हालांकि पाकिस्तान ने बुधवार को दावा किया था कि उसने अमेरिका के प्रयास को विफल कर दिया है। पेरिस के अंतरराष्ट्रीय वॉचडॉग ने उसे इस मामले में तीन महीने की छूट दे दी है।

बता दें कि थ्।ज्थ् एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो विभिन्न देशों के बीच मनी लांड्रिंग और टेरर फंडिंग जैसे मामलों को देखता है। 18 फरवरी को पैरिस में एफटीएफ की बैठक शुरू होने से पहले ही इस बात की चर्चा गर्म थी कि अमेरिका अपने यूरोपीय सहयोगियों की मदद से पाकिस्तान को निगरानी सूची में डालवाने की पूरी कोशिश करेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, यह अमेरिकी दबाव का ही नतीजा है कि गुरुवार को इस मुद्दे पर पाकिस्तान के खिलाफ फिर से वोटिंग की गुंजाइश बन रही है। दूसरी तरफ पाकिस्तान भी समर्थन जुटाने के लिए पूरा जोर लगा रहा है।

और दवाब बनाने की होगी कोशिश

अमेरिका का साफ कहना है कि पाक ने पाक ने आतंकवाद को फंडिंग रोकने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को लागू करने के लिए उचित कदम नहीं उठाया है। ऐसे में अमेरिका की कोशिश पाकिस्तान पर और दबाव बनाने की है। पिछले महीने ही अमेरिका ने पाकिस्तान को मिलने वाली करोड़ों डॉलर की सैन्य सहायता रोक दी थी। हालांकि पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता है।

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