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ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों का दावा

मंगल की सतह ने सोख लिया है मौजूद पानी

लंदन
‘मंगल ग्रह पर जीवन’ है या नहीं इसको लेकर हाल ही में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने नया दावा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मंगल की सतह ने इस पर मौजूद पानी को सोख लिया है और यही वजह है कि यह मनुष्यों के रहने लायक नहीं रह गया है। यूनिवर्सिटी के अर्थ साइंस विभाग की तरफ से किए गए नए शोध में ग्रह की परिस्थितियों में हुए अतिसूक्ष्म बदलाव को पेश किया है।

इस लाल ग्रह पर करीब 3 अरब साल पहले तक वैसे ही पानी मौजूद था जैसे कि अभी धरती पर है, लेकिन आधुनिक समय में मंगल बंजर और सूखा बन गया है। इस नए शोध में वैज्ञानिक बताते हैं कि मंगल पर मौजूद चट्टान धरती के मुकाबले पानी को 25 फीसदी अधिक रोक कर रख सकते हैं। यही चट्टान पानी को ग्रह के आंतरिक हिस्सों में भेज देते हैं। मंगल ग्रह पर जीवन की खोज से जुड़े वैज्ञानिकों का मुख्य ध्यान हमेशा पानी की मात्रा पर ही रहा है।

‘द इंडिपेंडेंट’ की रिपोर्ट

‘द इंडिपेंडेंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने मंगल पर पानी के साथ क्या हुआ इसको लेकर एक विचार प्रस्तुत किया है। पहले के शोधों में यह बात सामने आई है कि मंगल के चुंबकीय फील्ड के टूट जाने के बाद से सतह ने पानी को सोख लिया। हालांकि नए शोध में यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक बताते हैं कि पानी अभी भी मौजूद है, लेकिन वह रासायनिक प्रतिक्रिया (केमिकल रिऐक्शन) के कारण सतह में दबे हैं।

‘नेचर’ की रिपोर्ट

वैज्ञानिक पत्रिका ‘नेचर’ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य शोधकर्ता डॉ. जॉन वेड कहते हैं कि मंगल पर पानी ताजा निकले लावा में फंसा सा है जिससे लावा स्पंज की तरह दिख रहा है। पानी और चट्टान के बीच की प्रतिक्रिया (केमिकल रिऐक्शन) के कारण ग्रह की सतह सूख गई है जिससे यहां की परिस्थिति मानवों के रहने लायक नहीं रह गई है।

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