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ऐतिहासिक सेल्फी ने उस विचार को चुनौती दी कि व्यक्ति कौन है और कौन नहीं है

जकार्ता
अपनी दांत दिखाने वाली सेल्फी लेने के बाद सुर्खियों में आए और अमेरिका के कॉपीराइट मामले में ऐतिहासिक घटना को जन्म देने वाले इंडोनेशिया के बंदर को बुधवार को पशु अधिकारों के लिए काम करने वाले समूह ने पर्सन ऑफ द ईयर के तौर पर नामित किया है। पशु अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) ने ही इस बंदर की सेल्फी का मामला उठाया था।

पेटा ने नारूतो नामक इस बंदर को सम्मानित करते हुए यह कहा कि काले रंग का यह बंदर एक जीव है ना कि कोई वस्तु। पेटा के संस्थापक इनग्रिड नेवकिर्क ने एक बयान में कहा कि नारूतो की ऐतिहासिक सेल्फी ने उस विचार को चुनौती दी कि व्यक्ति कौन है और कौन नहीं है।

ऐसा पहली बार है जब इस पशु को किसी की संपत्ति घोषित करने के बजाय उसे संपत्ति का मालिक घोषित करने की मांग करते हुए कोई मुकदमा दायर किया गया है। बहरहाल इस मुकदमे से अंतरराष्ट्रीय कानूनी विशेषज्ञों के बीच पशुओं के लिए उनके व्यक्तित्व की पहचान और वे अपनी संपत्ति के मालिक हो सकते हैं या नहीं, इसे लेकर एक बहस छिड़ गई।

इस तरह ली थी सेल्फी

वर्ष 2011 में सुलावेसी द्वीप पर नारूतो ने ब्रिटिश नेचर फोटोग्राफर डेविड स्लेटर के लगाए एक कैमरे की लेंस की ओर घूरते हुए कैमरे का बटन दबा दिया था। डेविड प्रकृति एवं इससे जुड़ी वस्तुओं की तस्वीरें लेते हैं। यह तस्वीर तेजी से वायरल होने लगी थी और पेटा ने इसके खिलाफ मुकदमा दायर कर दावा किया था कि छह साल के नारूतो को अपनी तस्वीर का रचनाकार एवं मालिक घोषित करना चाहिए।

कमाई का 25त्न हिस्सा देना होगा

सितंबर में अदालत के फैसले के साथ मामले में इस बात पर सहमति बनी कि डेविड भविष्य में बंदर की सेल्फी के इस्तेमाल या उसकी बिक्री से होने वाली कमाई का 25 प्रतिशत हिस्सा इंडोनेशिया में इन बंदरों की रक्षा में मदद के लिए देंगे।

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