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Speech: Gilead teachings must be forgotten: Imran

सिद्धू के पीएम बनने तक न करना पड़े इंतजार , दुश्मनी की जंजीर तोडऩे के लिए आगे बढऩा जरूरी

करतारपुर। करतारपुर साहिब के लिए कॉरिडोर के शिलान्यास के मौके पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने दुश्मनी भूल दोस्ती की राह पर आगे बढऩे की बात कही है। पाक सरकार और सेना के बीच अक्सर मतभेद की चर्चा का जिक्र करते हुए उन्होंने साफ कहा कि भारत से बेहतर रिश्ते को लेकर देश की सरकार और फौज की राय एक है।

दोनों तरफ से गलतियां हुईं हैं लेकिन जब तक हम आगे नहीं बढ़ेंगे तब तक जंजीर (दुश्मनी की) को नहीं तोड़ पाएंगे। इमरान खान ने नवजोत सिंह सिद्धू की जमकर तारीफ भी की। उन्होंने भारत की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए कहा कि अगर हिंदुस्तान दोस्ती के लिए एक कदम बढ़ाएगा तो पाकिस्तान उसकी ओर दो कदम बढ़ाएगा। इमरान ने कहा कि दोनों मुल्कों के बीच दोस्ती के लिए नवजोत सिंह सिद्धू के प्रधानमंत्री बनने का इंतजार न करना पड़े कि जब वो प्रधानमंत्री बनें तब पाकिस्तान और हिंदुस्तान की दोस्ती होगी।

पाक पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि जर्मनी और जापान लड़ाई में करोड़ों लोगों का कत्ल कर चुके हैं, लेकिन अब उन्होंने जंजीरें तोड़ दीं और अब वे इसके बारे में सोच भी नहीं सकते। आज वे आगे बढ़ सकते हैं तो भारत और पाकिस्तान क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि  फ्रांस और जर्मनी एक यूनियन बनाकर आगे बढ़ सकते हैं तो हमने एक दूसरे के लोग भले मारे हों लेकिन वैसा कत्लेआम कभी नहीं किया। उन्होंने कहा कि हम एक कदम आगे बढ़ कर दो कदम पीछे चले जाते हैं। पिछले 70 वर्षों से हम इसी तरह के मामले देखते आ रहे हैं।

इमरान ने कहा कि हमारे में ताकत नहीं हैं कि कुछ भी होगा हम साथ रहने के बारे में सोचें और बातचीत जारी रखेंगे। मैं आज आपके सामने कह रहा हूं कि मैं पाकिस्तान का प्रधानमंत्री, सभी पार्टियां, फौज और हमारे सभी संस्थान एक साथ एक मत हैं। भारत से बेहतर रिश्ते के साथ हम आगे बढऩा चाहते हैं।

…और हम कश्मीर पर अटके हैं

इमरान खान ने आतंकवाद की बात नहीं की, पर कश्मीर का मुद्दा उठाना नहीं भूले। उन्होंने कहा कि हमारा मसला एक है कश्मीर का। उन्होंने कहा कि आज इंसान चांद पर पहुंच चुका है और हम कश्मीर पर अटके हैं। ऐसा कौन सा मसला है जिसे इंसान हल नहीं कर सकता।

“करतारपुर गलियारे के आधारशिला कार्यक्रम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा कश्मीर का उल्लेख करना बेहद खेदजनक है। जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा है।”
-विदेश मंत्रालय, भारत सरकार

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