हिमाचल दस्तक। शिमला
आईजीएमसी से दूसरे चरण में 50 फीसदी डॉक्टर बुधवार को छुट्टी पर चले गए हैं। ऐसे में पहले ही दिन स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई। जिसके चलते मरीजों को अपना इलाज करवाने के लिए दर-दर भटकना पड़ा। सुबह से ही ओपीडी में भीड़ लगी रही। यहां आधे से ज्यादा मरीजों के समय अनुसार चैकअप नहीं हो पाए।
वहीं, सबसे ज्यादा दिक्कतें तो उन मरीजों को हुई जिनका काफी समय पहले से एक ही डॉक्टर के पास इलाज चल रहा है। ऐसे में डॉक्टर के छुट्टी पर जाने से काफी सारे मरीज बिना चैकअप करवाएं ही वापिस घर की ओर लौट गए, क्योंकि यह मरीज दूसरे डॉक्टर से इलाज नहीं करवाना चाहते थे। इन दिनों डॉक्टरों का समर विकेशन चला हुआ है। दो चरणों में डॉक्टरों को छुट्टी प्रदान की गई है। पहले चरण के डॉक्टर वापिस लौट गए है जो कि अब अस्पताल का जिम्मा संभाल रहे हैं। वहीं, दूसरे चरण के भी डॉक्टर अब छुट्टी पर चले गए हैं।
आईजीएमसी में करीब 37 विभाग है, जिसमें से 7 विभागों को चमियाणा में शिफ्ट किया गया है, लेकिन वहां के डॉक्टर भी आईजीएमसी के डॉक्टरों के साथ ही छुट्टी पर गए हैं। हर विभाग से 3 या 5 डॉक्टर छुट्टी पर गए हैं। डॉक्टरों का समर विकेशन हर साल होता है। आईजीएमसी हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा अस्पताल होने के नाते यहां पर सैकड़ों मरीज अपना उपचार करवाने आते हैं। ऐसे में रोजाना की 3 हजार से 3500 की ओपीडी रहती है। ऐसे में इतनी भीड़ संभालना मुश्किल हो जाती है। चिकित्सक के छुट्टी पर जाने से यहां पर काफी ज्यादा दिक्कतें आ जाती हैं।
आईजीएमसी की प्रिंसिपल डॉ. सीता ठाकुर ने कहा कि आईजीएमसी में से दूसरे चरण में डॉक्टर छुट्टी पर चले गए है। यहां पर मरीजों को किसी भी प्रकार की कोई दिक्कतें नहीं आने दी जा रही है। 50 फीसदी डॉक्टर अस्पताल में उपस्थित है जो कि मरीजों का उपचार अच्छे से कर रहे हैं।









