पतलीकूहल। हिमाचल की देव परंपरा, आस्था और संस्कृति का एक अद्भुत संगम एक बार फिर देखने को मिला, जब कुल्लू जिले के आराध्य देव अनंत बालू नाग 14 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद मंगलवार को नग्गर जगती पधारे। देवता के आगमन से पूरा क्षेत्र भक्ति और उत्साह के रंग में रंग गया।
देवता अपने देव रथ और हरियानों सहित जब नग्गर जगती पहुंचे, तो श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। जगती पट मंदिर में भक्तों ने श्रद्धा से शीश नवाकर देव आशीर्वाद प्राप्त किया। ढोल-नगाड़ों, पारंपरिक वाद्य यंत्रों और जयकारों के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

पावन यात्रा 28 मार्च से हुई थी आरंभ
देव अनंत बालू नाग की यह पावन यात्रा 28 मार्च को उनके मूल देवालय तांदी (बंजार) से आरंभ हुई थी। यह देव यात्रा कुल्लू और मंडी जिलों की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है, जिसमें विभिन्न स्थानों पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना और लोक रीति-रिवाजों का निर्वहन किया जाता है। स्थानीय जनमान्यता के अनुसार, देव अनंत बालू नाग भगवान लक्ष्मण के अवतार माने जाते हैं, जो स्वयं भगवान राम के अनुज हैं। यही कारण है कि भक्तों के हृदय में इस देवता के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास है।
पवित्र स्थल वशिष्ट के लिए किया प्रस्थान
देवता के कारदार एवं पुजारी ख्याति राम के अनुसार, यह संपूर्ण यात्रा देव आज्ञा से ही संपन्न हो रही है। नग्गर जगती में देव कारबाई (धार्मिक अनुष्ठान) के पश्चात देवता मनाली के पवित्र स्थल वशिष्ट के लिए प्रस्थान कर चुके हैं, जहां वे शाही स्नान करेंगे। पवित्र स्नान के उपरांत देवता पुन: अपने मूल देवालय लौट जाएंगे। श्रद्धालुओं के लिए यह अवसर किसी महापर्व से कम नहीं, जहां आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।








