कई बगीचों में टूटें सेब के पौधे, बागवानों की मेहनत पर फिरा पानी, ओलावृष्टि से नुकसान
शिमला। हिमाचल में अप्रैल में हो रहीं बारिश, ओलावृष्टि और बर्फबारी ने कहर बरपा कर रख दिया है। अप्रैल के शुरुआती दिनों में हुई बर्फबारी ने बागवानों की कमर तोड़ कर रख दी है। मंगलवार रात को जिला शिमला में बारिश और बर्फबारी हुई है बुधवार को सुबह के समय जिला शिमला के ऊपरी क्षेत्रों में कई स्थानों पर बर्फबारी हुई है। जिला शिमला में सुबह रोहड़ू, रामपुर, नारकंडा, जुब्बल कोटखाई, फागू, ठियोग और कुफरी में बारिश के साथ ओलावृष्टि और बर्फबारी हुई है, जिससे सेब जिला शिमला के कई स्थानों पर सेब के पौधों को नुकसान पहुंचा है।

सेब के पौधों के ऊपर लगाई जालियों में भारी मात्रा में बर्फ जमने से पौधों को क्षति पहुंची है। मौजूदा समय में सेब के पौधों में पिंक स्टेज चल रही है। कई स्थानों पर सेब के पौधों में फूल खिले हुए हैं ऐसे में भारी बर्फबारी होने से पौधों सहित फूलों को नुकसान पहुंचा है। मौसम में आई करवट से बागवानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। जिला शिमला के कोटखाई व चौपाल में अप्रैल माह के दौरान बर्फबारी से बागवानी को भारी नुकसान पहुंचा है।
बागवान पौधों के नीचे जमा न होने दें पानी
बागवानों ने फूल को ओले से बचाने के लिए नेट लगाए गए है, लेकिन नेट पर बर्फ जमने के कारण वजन से ही सब के पौधों की टहनियां टूट गई हैं। बागवानी विशेषज्ञ का कहना है कि जहां पींक वर्डस सेब के पौधों में आए हैं और फूल खिल गए हैं उन क्षेत्रों के लिए बर्फबारी, ओलावृष्टि और बारिश नुकसानदायक है, लेकिन जिन लोगों ने पौधों में जालियां डाल दी हैं उन्हें ज्यादा नुकसान नहीं होगा। इस समय बागवानों को पौधों के नीचे पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। ज्यादा नमी के कारण भी फूल झड़ सकते हैं।
मटर की फसल को भी हो रहा नुकसान
वहीं किसान भी इस बारिश से नुकसान झेल रहे हैं। दरअसल इन दिनों जिला शिमला सहित प्रदेश के कई जिलों में मटर की फसल तैयार हो गई है, लेकिन बारिश के कारण अब इस फसल को बचाना किसानों के लिए मुसिबत बन गया है। वहीं टमाटर, गोभी, शिमला मिर्च और अदरक की फसल के लिए यह बारिश काफी फायदेमंद भी बताई जा रही है। मगर ज्यादा बारिश से इनमें भी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।









