बड़सर। हमीरपुर जिले के विख्यात सिद्ध पीठ बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में आयोजित चैत्र मास के मेलों के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर बाबा बालक नाथ के दर्शन कर रहे हैं और अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना कर रहे हैं। मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग रही हैं।

श्रद्धालु घंटों इंतजार के बाद पवित्र गुफा में पहुंचकर बाबा जी के चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन द्वारा मंगलवार को की गई चढ़ावे की गणना के अनुसार श्रद्धालुओं ने कुल 32 लाख 68 हजार 690 रुपये का नगद चढ़ावा अर्पित किया। इसमें से 25 लाख 49 हजार 940 रुपये दान पात्रों से प्राप्त हुए, जबकि 7 लाख 18 हजार 750 रुपये श्रद्धालुओं ने स्वेच्छा से डोनेशन के रूप में मंदिर न्यास को भेंट किए।
श्रद्धालुओं ने बहुमूल्य धातुएं भी की अर्पित
नकद चढ़ावे के अतिरिक्त श्रद्धालुओं ने बहुमूल्य धातुएं भी अर्पित कीं। इस दौरान 11 ग्राम 150 मिलीग्राम सोना और 112 ग्राम 350 मिलीग्राम चांदी मंदिर को भेंट की गई। इसके साथ ही विदेशी मुद्रा के रूप में भी श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा प्रकट की, जिसमें ब्रिटेन की पाउंड, 1055 अमेरिकी डॉलर, 143 यूरो, 260 कनाडाई डॉलर, 2720 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, 1125 यूएई दिरहम, 15 सऊदी रियाल तथा 50 न्यूजीलैंड डॉलर शामिल हैं।
18 हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
मंदिर प्रशासन के अनुसार मंगलवार को करीब 18 हजार श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में दर्शन किए। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, चिकित्सा सहायता, स्वच्छता और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। मेलों के इस पावन अवसर पर दियोटसिद्ध में उमड़ी श्रद्धालुओं की यह भीड़ न केवल क्षेत्र की धार्मिक आस्था को दर्शाती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है।
चैत्र मेलों के दौरान व्यवस्थाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार करते हुए दर्शन करें, ताकि सभी को सुगमता से बाबा जी के दर्शन का लाभ मिल सके।-केशव कुमार, मंदिर अधिकारी।







