राज्य के 151 स्कूलों में छात्रों को हिंदी-इंग्लिश दोनों भाषाओं में पढ़ने का मिलेगा मौका
शिमला। प्रदेश के सरकारी सीबीएसई स्कूलों में छात्रों की पढ़ाई आसान होगी। छात्रों को अंग्रेजी हिंदी दोनों भाषाओं में पढ़ने का ऑप्शन मिलेगा। इसके अलावा कुछ विषय अंग्रेजी, मैथ्स को छोड़कर छात्र हिंदी में भी इन विषयों को पढ़ पाएंगे। सीबीएसई बोर्ड ने अंग्रेजी की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। सीबीएसई ने अब तीन भाषाओं में छात्रों को पढ़ाने का ऑप्शन दे दिया है। जिसमें एक अंग्रेजी, भारतीय भाषा व एक पहाड़ी व लोकल भाषा शामिल है।

सीबीएसई द्वारा दी गई छूट के बाद शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने भी शिक्षा अधिकारियों को सीबीएसई बोर्ड की नई शर्तो के बारे में शिक्षक, अभिभावक व छात्रों को जागरूक करने के निर्देश दिए है। हिमाचल के 151 सरकारी स्कूलों में भी बोर्ड की नई शर्तों को माना जाएगा, जिसमें छात्रों को पढ़ने के लिए हिंदी व इंग्लिश का ऑप्शन दिया जाएगा, ताकि आगे चलकर उनके रिजल्ट पर बुरा प्रभाव न पड़े। दरअसल इससे पहले सरकारी स्कूलों के छात्रों को भय था कि कहीं इंग्लिश मिडियम में पढ़ाई करने से उनके फाइनल एग्जाम के रिजल्ट पर इसका असर न पड़े।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूल शिक्षा में बड़ा बदलाव
फिलहाल सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूल शिक्षा में बड़ा बदलाव किया है। अकादमिक सत्र 2026-27 से क्लास 6 के छात्रों के लिए नया 3.लैंग्वेज फार्मूला लागू किया है। इसके तहत विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य होगा। सरकार ने स्कूल शिक्षा निदेशालय को नियमों के तहत सरकारी सीबीएसई स्कूलों में पढ़ाई के ढांचे को लागू करने के निर्देश दिए है। बता दे तो बोर्ड के नियम के मुताबिक तीन भाषाओं में से दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी होगा।
सीबीएसई ने अंग्रेजी को विदेशी भाषा के विकल्प में रखा
सबसे बड़ा बदलाव यह माना जा रहा है कि अब अंग्रेजी की अनिवार्यता खत्म कर दी है। सीबीएसई ने अंग्रेजी को विदेशी भाषा के विकल्प में रखा है। यानी छात्र चाहें तो दो भारतीय भाषाओं के साथ तीसरी भाषा के रूप में अंग्रेजी चुन सकते हैं और चाहें तो किसी अन्य विदेशी भाषा का विकल्प भी ले सकते हैं। हालांकि अंग्रेजी और किसी दूसरी विदेशी भाषा को एक साथ चुनने का विकल्प नहीं होगा। जानकारी के अनुसार इस साल से सीबीएसई स्कूलों में तीसरी भाषा की नई किताबें इसी साल से छठी कक्षा में लागू की जाएंगी। वहीं वर्ष 2031 तक क्लास दसवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए थ्री लैंग्वेज सिस्टम पूरी तरह लागू हो जाएगा।
छात्रों को एक लोकल भाषा का भी मिलेगा ऑप्शन
हिमाचल सरकार ने स्कूल शिक्षा निदेशालय को सीबीएसई बोर्ड के नए नियमों को स्टडी कर छात्रों की पढ़ाई शुरू करने के निर्देश दिए है। जानकारी यह भी है कि हिमाचल के सीबीएसई स्कूलों में छात्रों को एक भाषा लोकल भी ऑप्शन में ली जाएगी, ताकि छात्र अपने-अपने क्षेत्र की भाषाओं को बोलने व समझने में सक्षम हो।
विदेशी भाषाओं के विकल्प होंगे सीमित
अभी तक ज्यादातर स्कूलों में छात्र अंग्रेजी, हिंदी और तीसरी भाषा के रूप में संस्कृत को चुनते है। हिमाचल में विदेशी भाषाओं का भी ऑप्शन छात्रों को दिया जाना था, लेकिन अब सीबीएसई बोर्ड जर्मन, फ्रेंच, मैंडरिन जैसी विदेशी भाषाओं के विकल्प सीमित करने की तैयारी में है।








