चंबा। हिमाचल प्रदेश के जंगल एक बार फिर जैव विविधता के अनमोल खजाने के रूप में चर्चा में हैं। प्रदेश में आए दिन दुर्लभ वन्यजीवों और पक्षियों की मौजूदगी दर्ज हो रही है, लेकिन इस बार चंबा के जंगलों से सामने आई तस्वीर ने वन्यजीव विशेषज्ञों को भी हैरान कर दिया है। चंबा जिले की अप्पर फॉरेस्ट रेंज में दुर्लभ प्रजाति का कैस्पियन कोबरा दिखाई दिया है, जो सामान्य तौर पर हिमालयी क्षेत्रों में नहीं पाया जाता।

कैस्पियन कोबरा आमतौर पर मध्य एशिया के देशों में पाया जाता है। इसकी मौजूदगी मुख्य रूप से अफगानिस्तान, ईरान, तुर्कमेनिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और पाकिस्तान के कुछ इलाकों में दर्ज की गई है। हिमालयी क्षेत्र में इसकी उपस्थिति बेहद दुर्लभ मानी जाती है और यही वजह है कि चंबा में इसका दिखना वैज्ञानिकों के लिए शोध का नया विषय बन गया है।
मध्य एशिया की प्रमुख प्रजातियों में गिना जाता है ये सांप
अपने बड़े फन, मजबूत शरीर और आक्रामक स्वभाव के लिए पहचाना जाने वाला यह जहरीला सांप मध्य एशिया की प्रमुख प्रजातियों में गिना जाता है। ऐसे में हिमाचल के जंगलों में इसकी मौजूदगी को जैव विविधता और वन्यजीव अनुसंधान के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जीव वैज्ञानिक करेंगे जांच
वन्यजीव अधिकारियों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में कैस्पियन कोबरा का मिलना बेहद असामान्य घटना है और इसकी विस्तृत जांच की जाएगी। विशेषज्ञ अब यह जानने की कोशिश करेंगे कि यह सांप यहां तक कैसे पहुंचा। यह भी देखा जाएगा कि क्या इस क्षेत्र में इस प्रजाति की स्थायी मौजूदगी है या फिर किसी विशेष पर्यावरणीय कारण, जलवायु परिवर्तन अथवा प्राकृतिक प्रवास के चलते यह सांप यहां तक पहुंचा है।
जैव विविधता के लिए शुभ संकेत
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी क्षेत्र में दुर्लभ प्रजातियों का दिखाई देना वहां के पारिस्थितिकी तंत्र की समृद्धि का संकेत भी हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों में हिमाचल प्रदेश के जंगलों में कई दुर्लभ जीव-जंतुओं और पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि प्रदेश के वन क्षेत्र जैव विविधता के लिहाज से अभी भी समृद्ध हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर मध्य एशिया का यह जहरीला और दुर्लभ सांप हिमाचल के पहाड़ों तक कैसे पहुंच गया।
फॉरेस्ट गार्ड द्वारा रिकॉर्ड किया गया वीडियो विभाग के पास है। सामान्य परिस्थितियों में इस प्रजाति के सांप यहां नहीं पाए जाते। ऐसे में यह संकेत हो सकता है कि इस क्षेत्र की जलवायु और प्राकृतिक परिस्थितियां इस प्रजाति के लिए अनुकूल साबित हो रही हैं। विभाग अब अप्पर फॉरेस्ट रेंज में जैव विविधता पर विशेष निगरानी रखेगा और अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों का भी अध्ययन करेगा।-राकेश कुमार, चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट।








