शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में चंबा नगर परिषद के गठन को लेकर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने संबंधित एमएलए द्वारा वोट का इस्तेमाल करने के पश्चात चुने गए अध्यक्ष व उपाध्यक्ष की गैजेट नोटिफिकेशन, परिणामी आदेश, शपथ-ग्रहण की कार्यवाही और पद-ग्रहण की कार्यवाही पर भी रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं।

न्यायाधीश रोमेश वर्मा ने प्रार्थी सीमा व अन्य द्वारा दायर याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के पश्चात प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले पर सुनवाई 15 जून को निर्धारित की गई है। प्रार्थियों का कहना है कि चम्बा नगर परिषद के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव गैरकानूनी तरीके से किया गया है क्योंकि कानूनन गैर निर्वाचित सदस्य अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकता।
कानून की स्पष्टता के बावजूद 4 जून को एमएलए ने अपने वोट का अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए इस्तेमाल किया। प्रार्थी का कहना है कि अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चुनाव होने के पश्चात उनकी गैजेट नोटिफिकेशन होना जरूरी है और अभी तक अवैध रूप से चुने गए अध्यक्ष व उपाध्यक्ष की गैजेट नोटिफिकेशन नहीं हुई है। प्रार्थियों का कहना है कि नोटिफिकेशन के प्रकाशन के पश्चात ही ये अपना पदभार ग्रहण कर सकते हैं।
प्रार्थियों की अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को पदभार ग्रहण करने से रोक लगाने की मांग
प्रार्थियों ने मांग की थी कि अवैध चुनाव होने के कारण चम्बा नगर परिषद के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को पदभार ग्रहण करने से रोका जाए और साथ ही इनकी नोटिफिकेशन के प्रकाशन पर भी रोक लगाई जाए। प्रार्थियों ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के उस अंतरिम आदेश का हवाला भी दिया जिसके तहत अन्य मामलों में एमएलए के उक्त पदों के लिए होने वाले चुनावों में वोट डालने पर रोक लगाई गई है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता की दलीलों से सहमति जताते हुए नगर परिषद चंबा के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के चुनाव के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए।








