मंदिर के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं की लगी लंबी लाइन, बस स्टैंड पार पहुंचे श्रद्धालु
चिंतपूर्णी। गर्मियों की छुट्टियों के चलते प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। रविवार को करीब 40 हजार श्रद्धालुओं ने मां चिंतपूर्णी की पावन पिंडी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। सुबह मंदिर के कपाट खुलते ही दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। आलम यह रहा कि डबल लाइन पुराना बस स्टैंड को पार करते हुए मुख्य बाजार तक पहुंच गई।

बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर प्रशासन और पुलिस विभाग की टीम दिनभर मुस्तैदी से डटी रही। श्रद्धालुओं को व्यवस्थित ढंग से दर्शन करवाने के लिए बैरिकेडिंग, लाइन प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार प्रयास किए गए। पुलिस कर्मियों और मंदिर प्रशासन के कर्मचारियों को भीषण गर्मी के बीच व्यवस्था बनाए रखने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।
तपती धूप में घंटों लाइन में खड़े श्रद्धालुओं को उठानी पड़ी परेशानी
हालांकि, भीड़ प्रबंधन के बीच कुछ महत्वपूर्ण कमियां भी सामने आईं। सबसे बड़ी परेशानी तपती धूप में घंटों लाइन में खड़े श्रद्धालुओं को उठानी पड़ी। पुराना बस स्टैंड के पास तक ही टेंट लगाए गए थे, जबकि उसके आगे लंबी कतारों में खड़े श्रद्धालुओं को तेज धूप में बिना किसी छाया के इंतजार करना पड़ा। नंगे पैर खड़े श्रद्धालुओं, महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इसके अलावा लाइन में खड़े श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था भी नहीं थी। भीषण गर्मी और उमस के बीच कई श्रद्धालु पानी की तलाश करते नजर आए।रविवार होने और अवकाश का दिन होने के कारण सुबह से ही मंदिर परिसर, बाजार और पार्किंग क्षेत्रों में भारी भीड़ देखने को मिली। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया था, जिससे किसी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।
व्यवस्थाओं को लेकर होती है समीक्षा
मंदिर अधिकारी सुशील प्रभाकर ने बताया कि रविवार को करीब 40 हजार श्रद्धालुओं ने मां चिंतपूर्णी के दर्शन किए। उन्होंने कहा कि बढ़ती भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन और पुलिस विभाग के सहयोग से सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा की जाती है, जहां भी सुधार की आवश्यकता होगी, वहां आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।







