100 से ज्यादा छात्र संख्या वाले विवि, कॉलेज, कोचिंग सेंटरों के लिए लागू की शर्त
शिमला। हिमाचल प्रदेश के कॉलेज व विश्वविद्यालयों में अब मनोवैज्ञानिक तैनात होंगे। सौ से ज्यादा छात्र संख्या वाले शिक्षण संस्थानों में छात्रों की मनोस्थिति को ठीक रखने और आत्महत्या जैसे भयावह स्थिति से बचाने के लिए अब शिक्षा विभाग सख्त हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर एक बार फिर से विभाग ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को छात्रों की मानसिक स्थिति को मजबूत करने रखने के लिए उचित व्यवस्था करने को कहा गया है। इसके अलावा शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में राज्य के सभी सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा और आत्महत्या रोकथाम से जुड़े दिशा-निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा है।
स्कूल शिक्षा निदेशक की ओर से सभी उपनिदेशकों (माध्यमिक, प्रारंभिक एवं गुणवत्ता) को जारी पत्र में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आपराधिक अपील संख्या 3177/2025 (सुकदेव साहा बनाम आंध्र प्रदेश सरकार एवं अन्य) के निर्णय के पैरा-35 में दिए गए 15 बिंदुओं का सभी शिक्षण संस्थानों में कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। यह निर्देश स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, प्रशिक्षण संस्थानों, कोचिंग सेंटरों और आवासीय शिक्षण संस्थानों पर समान रूप से लागू होंगे।
शिक्षकों के लिए नियमित मानसिक स्वास्थ्य एवं संवेदनशीलता प्रशिक्षण अनिवार्य
निर्देशों के अनुसार प्रत्येक शिक्षण संस्थान को छात्र मानसिक स्वास्थ्य एवं आत्महत्या रोकथाम नीति अपनानी होगी तथा उसे समय-समय पर अपडेट कर संस्थान की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करना होगा। 100 या उससे अधिक विद्यार्थियों वाले संस्थानों में प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक, काउंसलर या सामाजिक कार्यकर्ता की व्यवस्था करने तथा जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से समन्वय स्थापित करने को कहा गया है। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए नियमित मानसिक स्वास्थ्य एवं संवेदनशीलता प्रशिक्षण अनिवार्य किया है। साथ ही विद्यार्थियों पर अनावश्यक शैक्षणिक दबाव, सार्वजनिक रूप से अपमानित करने या केवल अंकों के आधार पर मूल्यांकन जैसी प्रवृत्तियों से बचने के निर्देश दिए गए हैं।
नियमित काउंसलिंग एवं जागरूकता कार्यक्रम होंगे आयोजित
गाइडलाइन के तहत सभी संस्थानों में शिकायत निवारण तंत्र, आपातकालीन सहायता व्यवस्था, हेल्पलाइन नंबरों का प्रदर्शन और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परामर्श सेवाएं उपलब्ध करवाना भी अनिवार्य होगा। छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए नियमित काउंसलिंग एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला उपनिदेशकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीन सभी स्कूलों एवं शिक्षण संस्थानों के प्रमुखों तक इन आदेशों को तत्काल पहुंचाकर इनका अक्षरश: पालन सुनिश्चित करें।








