डीआईजी साइबर क्राइम हिमाचल प्रदेश मोहित चावला ने कहा कि इन हेल्प डेस्क की स्थापना ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, सोशल मीडिया के दुरुपयोग, साइबर स्टॉकिंग, पहचान की चोरी, रैनसमवेयर और फिशिंग जैसे साइबर अपराधों की घटनाओं में तीव्र वृद्धि को देखते हुए राज्य पुलिस ने जमीनी स्तर पर साइबर अपराधों की रोकथाम एवं त्वरित कार्रवाई के लिए की जा रही है।
साइबर अपराधों से प्रभावित नागरिकों को तत्काल सहायता प्रदान करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए राज्य पुलिस द्वारा प्रदेश के ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों के प्रत्येक पुलिस थाना में समर्पित साइबर अपराध सहायता डेस्क स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश के किसी भी कोने में रहने वाला पीड़ित समय पर सहायता और न्याय से वंचित न रहे। राज्य के सभी 15 पुलिस जिलों में इंटीग्रेटेड साइबरक्राइम एक्सटेंडेड यूनिट्स की स्थापना की गई है, जो साइबर अपराधों की जांच और समन्वय को सुदृढ़ बनाएंगी।
ये सभी डेस्क हिमाचल साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर से आपस में जुड़ी होंगी, जिससे साइबर अपराधों की रोकथाम और प्रतिक्रिया में समन्वित और प्रभावी प्रणाली सुनिश्चित हो सकें।
उन्होंने कहा कि पूर्व में कई पुलिस थानों में विशेषीकृत साइबर इकाइयों की अनुपस्थिति के कारण समय पर प्रतिक्रिया और पीडि़तों को सहायता प्रदान करने में कठिनाई होती थी। इस अंतर को पाटने के लिए साइबर अपराध सहायता डेस्क को पीडि़तों के लिए प्रथम संपर्क बिंदु के रूप में कार्यरत किया गया है।
ये डेस्क नागरिकों को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से त्वरित रिपोर्टिंग में सहायता करेंगी। जिससे फर्जी वित्तीय लेनदेन को तत्काल रोका जा सकेगा और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित किया जा सकेगा। प्रत्येक सहायता डेस्क से सीधे एकीकृत होगी, जिससे विशेष जांच एजेंसियों के साथ समन्वय और शिकायतों के शीघ्र निवारण को सुनिश्चित किया जा सकेगा।
इसके अतिरिक्त प्रत्येक पुलिस जिले में साइबर नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जो जिला स्तर पर साइबर अपराध संबंधी कार्यवाहियों की निगरानी और संचालन करेंगे। यह नागरिक केंद्रित पहल राज्य पुलिस की साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने और समाज के सभी वर्गों को त्वरित एवं न्यायसंगत सेवा प्रदान करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।