मणिकर्ण। मंडी-कुल्लू सराज के आराध्य देवता ऋषि मार्कंडेय मंगलौर 30 वर्षों बाद तीर्थराज मणिकर्ण पहुंचे और अपने सैंकड़ों देवलुओं के साथ शाही स्नान किया। 16 जून को पैदल ही अपने मूल स्थान मंजा से चले देवता 18 शाम को मणिकर्ण पहुंचे और यहां प्राचीन राम मंदिर में विराजे। शुक्रवार सुबह देवता लाव लश्कर के साथ प्राचीन शिव मंदिर पहुंचे और वहां देवता ने कुंड के पानी से पवित्र स्नान किया।

इस दौरान देवता के साथ आये सैंकड़ों देवलुओं और महिलाओं ने भी गर्म पानी के चश्मों में आस्था की डुबकी लगाई। देवता ने अपने गुर के माध्यम से संदेश दिया कि ऐसी यात्रा प्राकृतिक आपदाओं से जनहानि रोकने और दु:ख बीमारी दूर करने के उद्देश्य से देवता करते हैं। इससे पूर्व भी देवता यहां कई बार आ चुके हैं लेकिन जब संकट बड़ा होता है तो कई दशकों बाद भी ये दौरे होते हैं।
देवता के आदेश मानना देवलुओं के लिए सर्वोपरि
देवता के पुजारी यज्ञ दत्त शर्मा ने कहा करीब 80 किलोमीटर दूर से देवता यहां पहुंचे हैं और वापस भी पैदल ही गांव जाएंगे। देवता ने आदेश दिया था कि मैं तीर्थराज मणिकर्ण जाऊंगा तो तभी देवलू देवरथ को लेकर पैदल ही चले हैं। वहीं देवता के कारदार जीवन शास्त्री ने कहा कि देवता के आदेश मानना हम देवलुओं के लिए सर्वोपरि होता है। न जाने इसके पीछे देवता की क्या भलाई हम प्राणियों के लिए साबित होती है इसलिए देवता के आदेश पर ये दौरा हुआ है जिसमें देवता भी खुश हुए हैं और सबको अपना आशीर्वाद बनाए रखने का संदेश दिया है। बता दें कि इससे पूर्व देवता शॉट नाला में अब बादल फटा था तो उस समय 37 लोगों की जान गई थी और देवता इसी मार्ग से आगे बढ़े थे तो उन्होंने पहले ही चेताया था कि ऐसा हादसा होने वाला है लेकिन साथ चलने वालों को कुछ नहीं होगा।








