करोड़ों का चढ़ावा, लेकिन तीन मौतों ने झकझोरा
हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध सिद्ध पीठ बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में आयोजित चैत्र मास का भव्य मेला इस वर्ष आस्था, श्रद्धा और अभूतपूर्व जनसैलाब के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। 14 मार्च से 13 अप्रैल तक चले इस एक माह लंबे धार्मिक आयोजन में देश-विदेश से करीब 12 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा के दरबार में माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे मेले के दौरान दियोटसिद्ध नगरी ‘जय बाबा बालक नाथ के जयकारों से गुंजायमान रही।

मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय स्थिति हुई मजबूत
एक माह के भीतर श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर न्यास को करोड़ों रुपये नकद चढ़ावे के रूप में अर्पित किए गए। इसके अलावा विदेशी मुद्रा, सोना और चांदी भी बड़ी मात्रा में प्राप्त हुई। पारंपरिक बकरों की नीलामी से भी लाखों रुपये की आय हुई, जिससे मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय स्थिति और अधिक मजबूत हुई है। यह आंकड़े न केवल श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को दर्शाते हैं, बल्कि मंदिर की बढ़ती लोकप्रियता का भी प्रमाण हैं।
व्यवस्था में नहीं आई कोई कमी
हालांकि इस बार मेले के संचालन में एक विशेष बात सामने आई पुजारियों की सीमित संख्या के बावजूद व्यवस्था में कोई कमी नहीं दिखी। जहां पूर्व वर्षों में 8 से 10 पुजारी सेवाएं देते थे, वहीं इस बार केवल 5 स्थायी पुजारियों ने पूरे मेले का भार संभाला। मुख्य पुजारी विपिन शर्मा के नेतृत्व में पुजारियों ने लगातार 8 से 12 घंटे प्रतिदिन बिना अवकाश अपनी सेवाएं दीं। मंदिर 14 मार्च से 13 अप्रैल तक 24 घंटे खुला रहा, जहां कम से कम दो पुजारी हर समय ड्यूटी पर तैनात रहे। गुफा स्थल पर केवल स्थायी पुजारियों द्वारा ही पूजा-अर्चना, प्रसाद अर्पण और बाबा की प्रतिमा का शृंगार किया गया। सुबह-शाम की आरती नियमित रूप से संपन्न करवाई गई।
प्रशासन ने की थी 300 अस्थायी कर्मचारियों की तैनाती
प्रशासन की ओर से लगभग 300 अस्थायी कर्मचारियों की तैनाती की गई थी, जिन्हें विभिन्न व्यवस्थाओं में लगाया गया। मंदिर न्यास अध्यक्ष एवं एसडीएम बड़सर स्वाति डोगरा, मंदिर अधिकारी केशव कुमार और अतिरिक्त मंदिर अधिकारी सुरम सिंह सहित पूरे प्रशासनिक अमले ने व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दियोटसिद्ध का यह चैत्र मेला एक ओर आस्था, श्रद्धा और आर्थिक समृद्धि का प्रतीक बनकर उभरा, वहीं तीन मौतों की घटनाओं ने संवेदनशील पहलू को भी उजागर किया।
प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधाओं के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे। भविष्य में व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके।-स्वाति डोगरा, एसडीएम बड़सर।








