शिमला। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हमीरपुर लोकसभा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने मंगलवार को पटना में भाजपा के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री नितिन नवीन के साथ बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में एक रोड शो और बाइक रैली निकाली। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्रीअरुण साव ने भी बिहार में एनडीए सरकार बनाने की अपील की।
अनुराग ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि “बिहार में एक ही आवाज गूंज रही है ‘रफ्तार पकड़ चुका बिहार, फिर एक बार एनडीए सरकार।’ अगर राजद-कांग्रेस की सरकार आई तो राज्य में एक बार फिर रंगदारी और कट्टा राज लौट आएगा, लेकिन बिहार की जनता ऐसा कभी नहीं होने देगी।”
उन्होंने याद दिलाया कि 2005 में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जब एनडीए की सरकार बनी, तो “लालू प्रसाद और राबड़ी देवी के शासन में पनपे जंगलराज के आदमखोर जानवरों को जेल के अंदर डाल दिया गया था। अब कुछ लोग बिहार को फिर उसी लालटेन युग में ले जाने की साजिश कर रहे हैं, लेकिन जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।”
ठाकुर ने कहा कि पिछले वर्षों में बिहार में अभूतपूर्व विकास हुआ है, प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है और अगले पांच वर्षों में इसे दोगुना करने का लक्ष्य है। “हर गांव में सड़कें बन रही हैं, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। मोदी जी और नीतीश जी के नेतृत्व में महिलाओं के बैंक खातों में 10,000 रुपये ट्रांसफर किए जा रहे हैं, लेकिन महागठबंधन के नेताओं को महिलाओं का यह सम्मान रास नहीं आ रहा है।”
राजद पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि “जो लोग रोजगार देने की बात करते हैं, वही लोग रेलवे भर्ती में जमीन के बदले नौकरी का घोटाला कर चुके हैं। लालू प्रसाद यादव का इतिहास रहा है जब भी मौका मिला, उन्होंने जानवर से लेकर आदमी तक सबका हिस्सा खा लिया।
शांता कुमार ने कहा कि अवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके हमलों की समस्या सरकार और समाज दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि “जब सरकार देश को आवारा कुत्तों के हमलों से नहीं बचा सकती, तो वह जनता की सुरक्षा की गारंटी कैसे देगी?”
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जहां 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अवारा कुत्तों के काटने जैसी बुनियादी समस्याओं पर सुप्रीम कोर्ट को दखल देना पड़ रहा है, जो देश के लिए दुःखद और शर्मनाक स्थिति है।