धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। प्रदेश सरकार ने स्कूल शिक्षा बोर्ड की इंप्रूवमेंट (सुधार) पॉलिसी को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस नीति के लागू होते ही मार्च 2026 से शुरू होने वाली बोर्ड परीक्षाओं में अब किसी विद्यार्थी को फेल या कंपार्टमेंट नहीं माना जाएगा। सरकार की स्वीकृति के साथ ही 21 जुलाई को प्रकाशित अमर उजाला की खबर पर भी आधिकारिक मुहर लग गई है।
दो बार परीक्षा का मौका, नहीं बर्बाद होगा साल
नई सुधार नीति के तहत अब शिक्षा बोर्ड वर्ष में दो बार परीक्षा आयोजित करेगा। पहली परीक्षा मार्च में होगी। जबकि सुधार परीक्षा (इंप्रूवमेंट एग्ज़ाम) जून-जुलाई में कराई जाएगी। जो विद्यार्थी पहली परीक्षा में सफल नहीं हो पाएंगे, उन्हें दूसरी परीक्षा में भाग लेने का मौका मिलेगा। इस बदलाव से विद्यार्थियों पर परीक्षा का दबाव घटेगा और उन्हें अपना शैक्षणिक वर्ष बचाने का अवसर मिलेगा।
फेल और कंपार्टमेंट शब्द होंगे इतिहास
नई नीति के तहत अब रिपोर्ट कार्ड में ‘फेल’ और ‘कंपार्टमेंट’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
यह पॉलिसी पहले चरण में सिर्फ 10वीं कक्षा पर लागू की जा रही है, जबकि शिक्षा विभाग अब इसे 12वीं कक्षा में भी लागू करने की दिशा में विचार कर रहा है।
बोर्ड सचिव ने की पुष्टि
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के सचिव डॉ. मेजर विशाल शर्मा ने बताया कि इंप्रूवमेंट पॉलिसी को राज्य सरकार की मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि “नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों पर मानसिक दबाव कम करना और उन्हें सुधार का समान अवसर देना है। जल्द ही इसकी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी।”