शिमला। राजधानी शिमला के सबसे व्यस्त और ऐतिहासिक स्थल माल रोड को उच्च स्तरीय अधिकारियों और माननीयों की सुविधा के लिए पार्किंग जोन में बदलने के निर्णय पर हाईकोर्ट ने सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है।
हाईकोर्ट ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि किन आधारों और नियमों के तहत माल रोड जैसे सार्वजनिक स्थल को विशिष्ट वर्ग के लिए आरक्षित किया गया। अदालत ने माल रोड के एक हिस्से को माननीयों की पार्किंग के लिए यूज करने पर कड़ा संज्ञान लेते हुए सरकार से येलो लाइन से जुड़ा सारा रिकॉर्ड तलब किया है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया की अगुवाई वाली खंडपीठ ने सरकार को येलो लाइन से जुड़ा सारा रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश करने के आदेश जारी किए हैं। अदालत ने अब इस मामले पर सुनवाई 26 नवंबर को निर्धारित की है।
अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान बताया गया कि पहली बार ऐतिहासिक मॉल रोड को पार्किंग स्थल बनाकर न्यायिक आदेश के साथ गतिरोध पैदा करने की कोशिश की जा रही है। हाईकोर्ट ने जब सरकार से उस अधिसूचना को दिखाने को कहा, जिसमें माल रोड पर पार्किंग के लिए येलो लाइन लगाने का जिक्र हो। दिलचस्प बात ये थी कि सरकार अदालत के समक्ष वह अधिसूचना पेश नहीं कर सकी।
उल्लेखनीय है कि ऐतिहासिक शिमला शहर की सडक़ों के किनारे कूड़ा-कचरा पड़े रहने से पर्यटन स्थल की खूबसूरती पर दाग लग रहा है। इसे आधार बनाते हुए हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई है। बाद में इस याचिका में उठाए मुद्दों को विस्तार देते हुए मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया की अगुवाई वाली खंडपीठ ने ऐतिहासिक माल रोड पर खासकर रॉक-सी होटल से होटल विलो बैंक तक के प्रतिबंधित हिस्से को पार्किंग स्थल बनाए जाने पर संज्ञान लिया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार के होम सेक्रेटरी सहित एसएसपी शिमला से जवाब तलब किया था।
याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा था कि अब यह देखा जा रहा है कि रॉक-सी होटल से विलो बैंक तक मॉल रोड के प्रतिबंधित हिस्से पर वाहन पार्क किए जा रहे हैं। अदालत को बताया गया था कि यहां अक्सर राज्यपाल कार्यालय के वाहनों सहित सांसदों व विधायकों की गाड़ियां पार्क रहती है। इस पर अदालत ने कहा था कि भले ही वाहनों में उक्त स्थान तक अधिकृत वीवीआईपी को ले जाने की अनुमति दी गई हो और इस बाबत भी पास जरूरी किया गया है। फिर भी क्या ऐसी अनुमति का उपयोग दिन या रात भर उक्त स्थान पर वाहनों को पार्क करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है?।
खंडपीठ ने कहा कि इसे अधिकतम ड्रॉप जोन ही माना जा सकता है। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि याचिका के लंबित रहते ऐतिहासिक माल रोड को अभी तो विधायकों और मंत्रियों के लिए येलो लाइन लगाकर पार्किंग स्थल में बदला जा रहा है परंतु आने वाले समय में ऐसे ही अन्य रसूखदारों के लिए यह येलो लाइन लंबी खींची जाएगी। इससे तो माल रोड की शान और रुतबा ही खत्म हो जाएगा।