हमीरपुर। हमीरपुर के सत्र एवं विशेष न्यायाधीश पंकज शर्मा की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पोक्सो अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपी पर अलग-अलग अवधि के कारावास और जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला गुरुवार को सुनाया गया।

अदालत ने आरोपी को पोक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माना, आईपीसी की धारा 376 (दुष्कर्म) के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माना, धारा 451 (घर में अनधिकृत प्रवेश) के तहत दो वर्ष के कारावास और दो हजार रुपये जुर्माना, धारा 341 (गलत तरीके से रोकना) के तहत एक वर्ष के कारावास और 500 रुपये जुर्माना तथा धारा 506 (आपराधिक धमकी) के तहत तीन वर्ष के कारावास और दो हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई।
न्यायालय के आदेशानुसार सभी सजाएं विधि के प्रावधानों के अनुसार लागू होंगी। अभियोजन पक्ष के अनुसार यह मामला 17 सितंबर 2022 का है। उस दिन पीड़िता के माता-पिता घर पर मौजूद नहीं थे। इसी दौरान आरोपी घर में घुस गया और नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद मामला पुलिस में दर्ज किया गया, जिसके बाद जांच पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए कुल 27 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज करवाए। गवाहों की गवाही, दस्तावेजी साक्ष्यों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया और उसे कड़ी सजा सुनाई। मामले की प्रभावी पैरवी जिला न्यायवादी संदीप अग्निहोत्री ने की।
अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों को न्यायालय ने पर्याप्त मानते हुए आरोपी को पोक्सो अधिनियम और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत दोषसिद्ध ठहराया। अदालत के इस फैसले को नाबालिगों के विरुद्ध यौन अपराधों के मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है, जो ऐसे अपराधों के प्रति न्यायपालिका के सख्त रुख को भी दर्शाता है।








