बिजली, पानी और सड़क न होने से लोग परेशान, प्रशासन पर लगाए उपेक्षा के आरोप
हमीरपुर। प्रदेश की राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र माने जाने वाले जिला हमीरपुर में पंचायतीराज चुनाव के दौरान एक गांव ने पूरी तरह चुनाव बहिष्कार कर प्रशासन और सरकार के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए। री पंचायत के वार्ड-1 के 288 मतदाताओं में से एक भी व्यक्ति मतदान केंद्र तक नहीं पहुंचा। गांव में शत-प्रतिशत चुनाव बहिष्कार चर्चा का विषय बना रहा।

ग्रामीणों का कहना है कि उनका गांव री पंचायत के अंतर्गत आता है, लेकिन पंचायत घर तक पहुंचने के लिए उन्हें लगभग 35 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता है। सड़क सुविधा न होने के कारण पंचायत तक पहुंचना बेहद कठिन है। ग्रामीणों के अनुसार वाहन से आने-जाने पर करीब एक हजार रुपये तक खर्च करना पड़ता है, जबकि पैदल रास्ता घने जंगल से होकर गुजरता है, जहां दिन में भी अकेले जाना सुरक्षित नहीं माना जाता।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। कई बार तीन से चार दिन तक बिजली आपूर्ति बाधित रहती है। पेयजल योजना बनने के बावजूद वर्षों से उसे शुरू नहीं किया गया। सड़क निर्माण के लिए ग्रामीण अपनी जमीन तक दे चुके हैं, लेकिन आज तक काम शुरू नहीं हो पाया।
प्रस्ताव पर आज तक नहीं हुई कोई कार्रवाई और न ही मिला कोई जवाब
ग्रामीणों के अनुसार 18 सितंबर 2024 को उन्होंने प्रस्ताव पारित कर जिला प्रशासन को भेजा था, जिसे बाद में शिमला भी प्रेषित किया गया। प्रस्ताव में मांग की गई थी कि गांव को नजदीकी पंचायत के साथ जोड़ा जाए अथवा अलग पंचायत का गठन किया जाए, ताकि लोगों को प्रशासनिक सुविधाएं सुलभ हो सकें। ग्रामीणों का आरोप है कि इस प्रस्ताव पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही प्रशासन की ओर से कोई जवाब मिला। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि जिला और प्रदेश स्तर पर बड़े राजनीतिक चेहरे होने के बावजूद किसी जनप्रतिनिधि ने उनकी समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए।
कहा-वर्षों से क्षेत्र की अनदेखी हो रही
उनका कहना है कि वर्षों से क्षेत्र की अनदेखी की जा रही है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जाता, तब तक पूरा गांव भविष्य में भी हर चुनाव का बहिष्कार करता रहेगा। उन्होंने इसके लिए प्रशासन और सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।








