16 को होना है राज्यसभा का चुनाव, क्रॉस वोटिंग का डर
शिमला। हरियाणा राज्य में राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाली चुनाव से पहले एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के तहत कांग्रेसी विधायकों को हिमाचल ला दिया गया है। सूत्रों के अनुसार करीब 31 विधायकों को यहां शिमला से नजदीक कुफरी में एक निजी होटल में ठहराया गया है जिन्हें पार्टी क्रॉस वोटिंग के डर से यहां लाई है। हरियाणा में कांग्रेस के 37 विधायक हैं जिनमें से 31 के हिमाचल आने की सूचना है।

15 मार्च तक वहीं पर ठहराए जाने की सूचना
बताया जाता है कि सोलन से दोपहर बाद यह सभी विधायक शिमला की तरफ आए हैं और यहां से इनका काफिला सीधा कुफरी के लिए निकल गया। वहां एक निजी होटल में इनके रहने की व्यवस्था की गई है। 15 मार्च तक इनको वहीं पर ठहराए जाने की सूचना है। राज्यसभा सीट को लेकर कहीं कोई राजनीतिक खेला न हो जाए इसके डर से कांग्रेस ने इन विधायकों को शिमला ला दिया है।
सता रहा क्रॉस वोटिंग का डर
16 मार्च को वहां पर राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है। क्रॉस वोटिंग का डर सता रहा है। ऐसे में इन विधायकों को एक साथ रखा गया है। इससे यहां राजनीतिक हलचल काफी ज्यादा बढ़ गई है। हिमाचल प्रदेश में भी राज्यसभा सीट को लेकर पिछले साल खेला हो चुका है। कांगे्रस के सामने हिमाचल का बड़ा उदाहरण है। हालांकि हरियाणा में कांग्रेस सत्ता में नहीं है परंतु फिर भी राजनीतिक उलटफेर की संभावनाओं में जुटी हुई है। इन्हीं संभावनाओं के चलते यहां पर हरियाणा के कांगे्रसी विधायकों को लाया गया है। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी थी। इसके चलते यहां पर सरकार के सामने संकट खड़ा हो गया था। कांग्रेेस के विधायक बागी हो गए और यहां उपचुनाव तक करवाना पड़ा। कांग्रेस के बागी विधायकों के साथ यहां पर आजाद उम्मीदवार भी विपक्ष के साथ चले गए थे जिसके चलते सत्तारूढ़ कांग्रेस को राज्यसभा की सीट नहीं मिली। हरियाणा में भी वहां की भाजपा सरकार के सामने कुछ संकट है। वहां दूसरे दल भी कहीं न कहीं समर्थन से पीछे हट रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस के विधायकों पर भाजपा की सरकार डोरे डाल रही है और कहीं यह विधायक क्रॉस वोटिंग न कर दें इसी डर से उन्हें एक साथ हरियाणा से बाहर हिमाचल लाया गया है ताकि उनका किसी के साथ कोई संपर्क न हो। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में माहौल गर्माया हुआ है। कांग्रेस भी चाहती है कि हरियाणा में कोई खेला हो जाए और वहां सत्तारूढ़ भाजपा की जगह पर कांग्रेस का ही उम्मीदवार राज्यसभा को चुन लिया जाए। इस तरह की संभावनाओं पर भी कांग्रेस काम कर रही है जिसके चलते उसे अपने विधायकों को एकजुट करके रखना होगा।






