शिमला। प्रदेश के एक शराब ठेकेदार को अदालत का समय बर्बाद करना मंहगा पड़ा है। अदालत ने ठेकेदार पर भारी जुर्माना लगाया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शराब ठेकेदार स्वरूप सिंह राणा पर अदालत का समय बर्बाद करने के लिए 2 लाख रुपये जुर्माना लगाया है। हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता यह राशि 30 नवंबर तक मुख्य न्यायाधीश आपदा राहत कोष में जमा कराए।
अदालत की यह कार्रवाई उस समय हुई जब ठेकेदार ने अपनी सहमति से तय 31 अक्टूबर 2025 की समय सीमा के बावजूद बकाया 1.83 करोड़ का लाइसेंस शुल्क नहीं चुकाया। मामले के अनुसार शराब ठेकेदार ने लाइसेंस फीस का बकाया नहीं चुकाया था। राज्य सरकार ने कहा कि ठेकेदार ने केवल 38.84 लाख रुपये ही जमा किए हैं। अदालत ने रकम चुकाने को लेकर समय बढ़ाने की मांग खारिज कर दी, लेकिन आंशिक राहत देते हुए 15 दिसंबर 2025 तक की नई समय सीमा दी।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने ठेकेदार पर सख्ती बरतते हुए एक और आदेश जारी किया। खंडपीठ ने ये भी शर्त रखी है कि यदि शराब ठेकेदार स्वरूप सिंह राणा 15 दिसंबर तक तय रकम का भुगतान नहीं करता, तो उसे 25 लाख रुपये का अतिरिक्त हर्जाना देना होगा।
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने अपने स्तर पर पहल करते हुए मानसून सीजन में आई आपदा को लेकर राहत कोष का गठन किया है। ये आपदा राहत कोष मुख्य न्यायाधीश राहत कोष के नाम से है। इसमें सभी न्यायिक अधिकारी वर्ग सहित कानून से जुड़े लोगों ने अंशदान किया है। अब ठेकेदार को भी 2 लाख की रकम इसी कोष में जमा करवाने के आदेश जारी किए गए हैं।