शिमला। प्रदेश के पांच फौजी जवानों को सेना की तरफ से सम्मानित किया गया है। मंडी, बिलासपुर, शिमला और ऊना के पांच वीर सपूतों को वीर और शौर्य चक्र से नवाजा गया है। दरअसल, नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मैडल देकर सम्मानित किया, इसमें बिलासपुर के बलदेव चंद को मरणोपरांत शौर्य चक्र मिला है।

शहीद बलदेव चंद मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित
बिलासपुर की सनीहरा पंचायत के गांव थेह के वीर सपूत लांस दफादार बलदेव चंद को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। 19 सितंबर 2025 उधमपुर के सियोज धार खड्ड नाला क्षेत्र में आतंकियों के साथ मुठभेड़ हुई थी और बलदेव चंद बिना जान की परवाह किए आतंकियों पर टूट पड़े। भीषण हाथापाई के दौरान उन्होंने एक आतंकी से विदेश निर्मित पिस्तौल छीन ली और अपने कई साथियों की जान बचाई। इस दौरान उनके सीने में गोली लगी, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अंतिम सांस तक आतंकियों का मुकाबला जारी रखा और वीरगति को प्राप्त हुए। उनकी पत्नी शिवानी और मां विजय कुमारी ने यह सम्मान हासिल किया।

कैप्टन योगेंद्र ठाकुर को साहस और सूझबूझ के लिए सम्मान
जोगिंद्रनगर उपमंडल की दारट बगला पंचायत के निवासी और भारतीय सेना के कैप्टन योगेंद्र ठाकुर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया है। उन्हें जम्मू-कश्मीर में एक आतंकरोधी अभियान के दौरान प्रदर्शित अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया। कैप्टन योगेंद्र ठाकुर ने आतंकियों के खिलाफ अभियान के दौरान चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपने दल का नेतृत्व किया। अभियान के दौरान उन्होंने साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए मिशन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। योगेंद्र रेंगते हुए गए और नजदीकी मुठभेड़ में एक आतंकी को मार गिराया। उनकी वीरता और उत्कृष्ट सैन्य सेवा को देखते हुए उन्हें देश के तीसरे सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। कैप्टन योगेंद्र ठाकुर के पिता अनिल ठाकुर सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य हैं। जबकि जबकि माता बिना देवी गृहणी हैं। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कैप्टन योगेंद्र ठाकुर को हार्दिक बधाई दी।

जोगिंद्रनगर के मकरीड़ी क्षेत्र के नायब सूबेदार सतीश कुमार को मिला वीर चक्र
जोगिंद्रनगर के मकरीड़ी क्षेत्र के समोहली गांव निवासी नायब सूबेदार सतीश कुमार को वीरता के लिए देश के प्रतिष्ठित सैन्य अलंकरण वीर चक्र से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति ने उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। नायब सूबेदार सतीश कुमार चौथी बटालियन डोगरा रेजिमेंट में सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें दुश्मन की गोलीबारी के बीच साहसिक कार्रवाई, उत्कृष्ट पेशेवर दक्षता और कर्तव्य के प्रति समर्पण के लिए वीर चक्र से अलंकृत किया गया है। सतीश कुमार के पिता नंद लाल पूर्व सैनिक हैं, जबकि माता कृष्णा देवी गृहिणी हैं। वर्तमान में उनकी तैनाती पंजाब के अबोहर में है।

शिमला जिले जुब्बल के मेजर अंशुल बाल्टू को प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार से नवाजा
शिमला जिले के जुब्बल के घुंसा गांव के मेजर अंशुल बाल्टू को प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार से नवाजा गया। असम राइफल्स के अधिकारी मेजर बाल्टू 32 ने विशेष सैन्य अभियान के दौरान अदम्य साहस दिखाया था। इस दौरान मेजर अंशुल के पिता प्रमोद बाल्टू, माता प्रेम लता बाल्टू और पत्नी पारुल बाल्टू भी उपस्थित रहीं। मेजर अंशुल को अप्रैल 2025 में असम के दीमा हसाओ क्षेत्र में चलाए गए एक अभियान के लिए चुना गया था। अभियान में उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ हुई थी। मेजर बाल्टू ने बहादुरी दिखाते हुए एक उग्रवादी को मार गिराया। इस कार्रवाई से अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

ऊना जिले के सूरज पराशर को शौर्य चक्र मिला
ऊना जिले के चढ़तगढ़ के सपूत लेफ्टिनेंट कमांडर सूरज पराशर को राष्ट्रपति ने शौर्य चक्र से सम्मानित किया। छह नवंबर 2024 को कशमीर में सूरज को तलाशी अभियान की जिम्मेदाराी सौपी गई। उन्होंने घर में छिपे आतंकियों पर गोलीबारी की। इसी बीच सेना ने दोनों आतंकियों को मार गिराया था। डिप्टी सीएम उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री उन्हें बधाई दी।








