शिमला। राजधानी शिमला के ऐतिहासिक जाखू मंदिर में इस बार दशहरा उत्सव ने लोगों को नया अनुभव दिया। हर साल की तरह यहां रावण का पुतला आग में धू-धू कर जलता है। वहीं, इस बार रावण, मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतलों में तकनीकी झलक और कलात्मकता दोनों का अनोखा संगम देखने को मिला।
खास तकनीक से तैयार किए गए थे पुतले
45 फीट ऊंचे रावण, 40-40 फीट के मेघनाथ और कुंभकर्ण के पुतले पंजाब से आए कलाकारों ने खास तकनीक से तैयार किए थे। जैसे ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पुतले को परंपरागत तरीके से आग लगाई तो रावण के सिर से आग निकली, आंखों से आंसू बहे और धधकते पुतले के बीच फव्वारे का नजारा देख हर कोई हैरान रह गया। इस बार रावण युद्ध के परिधान में नजर आया, जिसने देखने वालों को और भी रोमांचित कर दिया। पिछले कई वर्षों से जहां रावण दहन रिमोट से किया जाता था। वहीं, इस बार परंपरा को जीवंत रखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर ने मशाल से पुतले को आग लगाई।
शाम 6:10 बजे के बाद जैसे ही रावण दहन शुरू हुआ। जाखू मंदिर परिसर “जय श्रीराम” के नारों से गूंज उठा। हजारों लोग इस अद्भुत दृश्य के साक्षी बने और अपने मोबाइल व कैमरों में इसे कैद करते दिखे।
यातायात व सुरक्षा की विशेष व्यवस्था
दशहरा को देखते हुए प्रशासन ने पहले से ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। जाखू मंदिर परिसर तक पहुंचने के लिए रिट्ज, संजौली और छोटा शिमला से विशेष टैक्सियों की व्यवस्था की गई। निजी वाहनों को परिसर तक आने की अनुमति नहीं थी और दूरस्थ पार्किंग में ही रोक दिया गया। वहीं, भीड़ प्रबंधन के लिए मंदिर समिति ने वैकल्पिक रूट भी तय किए थे।