शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। बुधवार रात से गुरुवार सुबह तक प्रदेश के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश हुई, जिससे भूस्खलन और सड़कें बंद होने की घटनाएं सामने आई हैं। राजधानी शिमला समेत कई जिलों में बारिश ने जनजीवन और जरूरी सेवाओं को प्रभावित किया है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार प्रदेश में 110 सड़कें बंद, 198 बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित और 56 पेयजल योजनाएं ठप हैं। मौसम विभाग ने 3 से 5 सितंबर तक भारी बारिश को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है।

110 सड़कें बंद, मंडी सबसे ज्यादा प्रभावित
लगातार बारिश के कारण जगह-जगह पहाड़ियों से मलबा और पत्थर गिरने से सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। सबसे ज्यादा सड़कें मंडी जिले में बंद हैं।
जिला-wise बंद सड़कें:
- मंडी: 51
- कुल्लू: 22
- शिमला: 8
- सिरमौर: 8
- चंबा: 7
- कांगड़ा: 7
- ऊना: 4
- सोलन: 2
प्रभावित सड़कों को खोलने के लिए संबंधित विभागों की ओर से काम किया जा रहा है, लेकिन बारिश और भूस्खलन के कारण बहाली कार्यों में भी मुश्किलें आ रही हैं।
198 ट्रांसफार्मर बंद, बिजली आपूर्ति प्रभावित
भारी बारिश का असर बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा है। प्रदेश में कुल 198 बिजली ट्रांसफार्मर बंद बताए गए हैं।
इनमें:
- रामपुर में 50
- बद्दी में 35
- चंबा में 35
- अर्की में 30
- कुल्लू में 26
- सिरमौर में 11
- चौपाल में 3 ट्रांसफार्मर प्रभावित हैं।
इससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई है।
56 पेयजल योजनाएं ठप
बारिश और भूस्खलन के चलते पेयजल योजनाओं पर भी असर पड़ा है। प्रदेश में कुल 56 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं। शिमला में 33 और हमीरपुर में 23 पेयजल योजनाएं बंद हैं। ऐसे में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को पेयजल आपूर्ति सामान्य होने का इंतजार करना पड़ रहा है।
परवाणू में पहाड़ी से मलबा गिरा, NH-05 पर बढ़ी परेशानी
सोलन जिले के परवाणू में तेज बारिश के बाद स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई। परवाणू-पिंजौर खंड में पहाड़ी से मलबा, चट्टानें और पत्थर गिरने से मुख्य बाईपास मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ। बारिश के दौरान एक पुल को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है। प्रशासन ने वाहन चालकों और स्थानीय लोगों से प्रभावित हिस्से में सावधानी बरतने की अपील की है।
गिरि जटोंन डैम के चार गेट खोले, मैदानी इलाकों में अलर्ट
सिरमौर में लगातार बारिश के बीच गिरि जटोंन डैम के चार गेट खोले गए हैं। इससे पहले भी देर रात डैम से पानी छोड़ा गया था। पानी छोड़े जाने के बाद जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने मैदानी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए अलर्ट जारी किया है। नाहन समेत सिरमौर के कई इलाकों में रातभर तेज बारिश हुई।
नैना देवी में 130.6 मिमी बारिश
पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई इलाकों में अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गई। बिलासपुर के नैना देवी में सबसे अधिक 130.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई।
इसके अलावा:
- मंडी के मुरारी देवी में 85.8 मिमी
- जटोन बैराज में 67.6 मिमी
- नाहन में 45.4 मिमी
- कसौली में 45.0 मिमी
- धर्मशाला में 37.1 मिमी
- पछाड़ में 33.0 मिमी
- घमरूर में 25.2 मिमी
- जोगिंद्रनगर में 19.0 मिमी
- सोलन में 18.6 मिमी
- कुल्लू के कोठी में 18.0 मिमी बारिश हुई।
कांगड़ा में बारिश के साथ गरज-चमक भी हुई। हालांकि इस दौरान ओलावृष्टि और तेज हवाओं की सूचना नहीं है।
5 सितंबर तक भारी बारिश का येलो अलर्ट
मौसम विभाग के मुताबिक 3, 4 और 5 सितंबर को हिमाचल के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। इन तीन दिनों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद भी बारिश पूरी तरह थमने के आसार नहीं हैं। 6 सितंबर को कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है, जबकि 7 से 9 सितंबर तक भी अलग-अलग जगहों पर बारिश की संभावना है। हालांकि इन दिनों के लिए फिलहाल भारी बारिश की चेतावनी जारी नहीं की गई है।
मानसून में अब तक 261 मौतें, 471 लोग घायल
इस मानसून सीजन में बारिश और इससे जुड़ी घटनाओं ने हिमाचल में भारी नुकसान पहुंचाया है। अब तक 261 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 471 लोग घायल हुए हैं। तीन लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। मृतकों में 154 लोगों की जान सड़क हादसों में गई है, जबकि 107 मौतें भूस्खलन, अचानक बाढ़, पानी में बहने, फिसलने, पहाड़ी से गिरने और बारिश से जुड़ी अन्य घटनाओं में हुई हैं। प्राकृतिक आपदाओं के कारण 461 मवेशियों की भी मौत हुई है।
1,202 करोड़ रुपये का नुकसान
बारिश और प्राकृतिक आपदाओं ने प्रदेश की संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। सरकारी आकलन के अनुसार इस मानसून सीजन में अब तक करीब 1,202 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है।
इसमें:
- 112 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त
- 463 मकानों को आंशिक नुकसान
- 17 दुकानें ध्वस्त
- 415 पशुशालाएं क्षतिग्रस्त
- लोक निर्माण विभाग को करीब 914 करोड़ रुपये का नुकसान शामिल है।








