लाहौल स्पीति। लगातार बरसात और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी ने लाहौल घाटी के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम की मार से आलू की फसल पर बुरा असर पड़ा है। जिससे उत्पादन में भारी गिरावट की आशंका जताई जा रही है। किसानों का कहना है कि खेतों में पानी भरने और ठंड बढ़ने से आलू सड़ने लगे हैं, जिससे उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है।
हिमाचल प्रदेश का जनजातीय जिला लाहौल स्पीति जो शीत मरुस्थल के नाम से जाना जाता है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए देश दुनिया में मशहूर है। हालांकि साल 2020 में अटल टनल बनने के बाद लाहौल घाटी में सैलानियों की संख्या का दायरा भी बढ़ा है, लेकिन जब अटल टनल नहीं थी तो आलू ने लाहौल घाटी को देश दुनिया में एक अपनी अलग पहचान दी थी। बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी आलू के बीज के लिए हमेशा रोहतांग दर्रा लांघ कर लाहौल घाटी पहुंचती रही। इस साल बरसात के चलते लाहौल घाटी में आलू की फसल को भी 40 फीसदी तक नुकसान हुआ है। इसके अलावा असमय हुई बर्फबारी के चलते किसानों की दिक्कतें भी बढ़ी हैं।
लाहौल घाटी की आलू की फसल प्रभावित
लाहौल घाटी के जिला परिषद सदस्य कुंगा बौद्ध कहते हैं कि, “पिछले महीने से किसान आलू की फसल निकालने का काम कर रहे थे और इस महीने अचानक हुई बर्फबारी के कारण किसानों की फसल खेतों में ही खड़ी है। बरसात के मौसम में किसानों की फसल खेतों में ही 40 फीसदी तक खराब हो गई है। ऐसे में अब सरकार जल्द से जल्द इस पूरे नुकसान का आकलन करे, जिससे प्रभावित किसानों को राहत मिल सके।
ट्रांसपोर्ट पर सब्सिडी नहीं मिलने से घाटी के किसान परेशान
लाहौल पोटैटो समिति के निवर्तमान अध्यक्ष सुदर्शन जसपा ने कहा कि समिति के माध्यम से हजारों किसान आलू की खेती कर रहे हैं। लेकिन, प्रदेश सरकार द्वारा समिति को ट्रांसपोर्ट सब्सिडी नहीं दी जा रही है। भारत के कई राज्यों में आलू उत्पादन से जुड़ी समिति को सरकार ट्रांसपोर्ट में सब्सिडी देती है, लेकिन हिमाचल सरकार की ओर से अभी तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है। अगर सरकार ट्रांसपोर्ट पर सब्सिडी देती है तो इससे आलू उत्पादन से जुड़े किसानों को काफी फायदा होगा।
आलू से घाटी के किसानों की आर्थिकी मजबूत
लाहौल घाटी सेव संस्था के अध्यक्ष प्रेम सिंह ने बताया कि 1854 में मिशनरी ए डब्लू हाइड ने केलांग के पास सबसे पहले आलू की खेती की थी और आलू का फॉर्म भी तैयार किया था। उस दौरान लाहौल घाटी में 6 महीने बर्फ रहती थी और गर्मियों के सीजन में ही किसान जौ, गेहूं और कुछ पहाड़ी सब्जियों की खेती करते थे। आलू की खेती से किसानों की आर्थिकी की भी मजबूत हुई है। कई किसान मिलकर संस्था तैयार करके अपने खेतों में आलू के बीज तैयार कर उन्हें कंपनियों को बेचते हैं। इससे अब यहां के लोग आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रहे हैं।