शिमला। अदालतों को जरूरी खर्च के लिए तय रकम जारी न करने पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया व न्यायमूर्ति रंजन शर्मा की खंडपीठ ने मामले को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार के वित्त सचिव को निजी तौर पर 13 नवंबर को 10 करोड़ रुपए के ड्राफ्ट के साथ अदालत में पेश होने के लिए कहा है।
खंडपीठ ने कहा है कि वित्त सचिव को हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के नाम पर 10 करोड़ का ड्राफ्ट लेकर पेश होना होगा। यदि ऐसा न किया गया तो अवमानना का नोटिस जारी किया जाएगा। दरअसल, हाईकोर्ट ने धन के अभाव में विभिन्न अदालतों का कामकाज प्रभावित होने को लेकर स्वत: संज्ञान लिया है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष बताया गया कि 3 सितंबर 2025 को 81.23 लाख रुपए की डिमांड की गई थी। अदालत के समक्ष ये तथ्य सामने आया कि 1.64 करोड़ रुपए मेडिकल खर्चों के लंबित हैं।
कुल मिलाकर सभी मदों में 6.88 करोड़ रुपए से अधिक की रकम सरकार की तरफ लंबित है। इसके अलावा वाहनों की खरीद के लिए तय 4.07 करोड़ रुपए की रकम भी ड्यू है। कुल मिलाकर ये रकम 10 करोड़ रुपए बनती है।
खंडपीठ के समक्ष ये तथ्य भी आया कि कुछ न्यायालयों की स्थापना को लेकर भी सरकार संसाधनों की कमी का बहाना बनाती है। मामले में राज्य सरकार के महाधिवक्ता अनूप रत्न ने अदालत में कहा कि सीएम को इससे अवगत करवाया गया है। खंडपीठ ने पूरे मामले में प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर खेद जताया और कहा कि वित्त सचिव को अगली सुनवाई पर दस करोड़ रुपए का ड्राफ्ट लेकर पेश होना होगा।
मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर को तय की गई है। आदेश में कहा गया है कि यदि कुल रकम रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से अदालत के खाते में जमा करवा दी जाती है तो वित्त सचिव को पेश होने से छूट मिल जाएगी, अन्यथा अवमानना की कार्यवाही के लिए तैयार रहना होगा।