शिमला। हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में स्नो लेपर्ड के कुनबे में बढ़ौतरी हुई है। यह खुलासा हाल ही में करवाए गए अध्ययन में हुआ है। राज्य में इस वक्त 83 बर्फानी तेंदुए मौजूद है। 2021 में हुए अध्ययन से इस बार इनकी संख्या बढ़ी है। चार सालों में 10 स्नो लेपर्ड की वृद्धि हुई है। जिससे यह साफ हो गया है कि हिमाचल की वादियां और बर्फीले पहाड़ स्नो लेपर्ड के लिए बेहतर जगह है। 2021 में हुए अध्ययन में स्नो लेपर्ड की संख्या 73 पाई गई थी।
इस बार 26 हजार 112 वर्ग किलोमीटर फैले क्षेत्र पर कैमरे लगाए गए थे। जिसकी रिपोर्ट अब सामने आ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल में लगभग 83 बर्फानी तेंदुए मौजूद है। जो कि वर्ष 2021 में प्रकाशित रिपोर्ट से अधिक हैं। इस बड़े पैमाने पर कैमरा ट्रैपिंग सर्वेक्षण में 44 अनोखे हिम तेंदुओं का पता लगाने की सूचना मिली, जो पिछले सर्वेक्षण के समान ही है और इन गतिविधियों का 262 बार पता चला। जिसके विश्नेषण के बाद हिम तेंदुओं की आबादी का पता लगाया गया है। अध्ययन के अनुसार हिम तेंदुए का घनत्व प्रति 100 वर्ग किमी में 0.16 से 0.53 तक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्नो लेपर्ड की संख्या में वृद्धि होने का मुख्य कारण आवास में सुधार होना, बेहतर तरीके से संरक्षण और शिकार की अधिकतता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में स्नो लेपर्ड के कुनबे में और भी ज्यादा बढ़ौतरी होगी। यह अध्ययन हिमाचल प्रदेश वन विभाग के वन्यजीव विंग द्वारा नेचर कंजर्वेशन फाउंडेशन एनसीएफ के साथ साझेदारी में किया गया और इन पहाड़ी इलाकों में कैमरा ट्रैप की तैनाती स्पीति के किब्बर गांव के आठ स्थानीय युवाओं की एक टीम द्वारा की गई थी।
संरक्षित क्षेत्रों से बाहर भी हिम तेंदुए रह रहे
सर्वेक्षण किए गए संरक्षित क्षेत्रों में हिम तेंदुओं की उपस्थिति दर्ज की गई। जिनमें किब्बर वन्यजीव अभयारण्य, ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क, सेचु तुआन नाला वन्यजीव अभयारण्य और असरंग वन्यजीव अभयारण्य के कुछ हिस्से शामिल थे। लेकिन कई हिम तेंदुओं की उपस्थिति संरक्षित क्षेत्रों के बाहर भी दर्ज की गई। यह इस बात को दर्शाता है कि हिम तेंदुओं के आवासों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और हिमाचल प्रदेश में हिम तेंदुओं के पूरे क्षेत्र में समुदाय.आधारित संरक्षण पहलों की आवश्यकता को बल देता है।
यह प्रजातियां भी हुई कैमरों में कैद
हिम तेंदुओं के अलावा अन्य नई प्रजातियों की भी खोज हुई है। नीली भेड़, हिमालयन आइबेक्स और कस्तूरी मृग जैसी प्रमुख शिकार प्रजातियों की चहमकदमी दिखाई गई है। अन्य स्तनधारियों में हिमालयन भेडिय़ा, भूरा भालू, सामान्य तेंदुआ, लाल लोमड़ी स्टोन मार्टन, माउंटेन वीज़ल और पीले गले वाला मार्टन शामिल हैं। इस अध्ययन में किन्नौर में पल्लास बिल्ली का पहला आधिकारिक दृश्य और लाहौल में ऊनी उडऩे वाली गिलहरी यूपेटोरस सिनेरियस की पुन: खोज दर्ज की गई।
हिमाचल में स्नो लेपर्ड का कुनबा बढ़ रहा है। हाल ही में हुए अध्ययन में यह सामने आया है। 2021 के बाद हुए अध्ययन में स्नो लेपर्ड की संख्या बढऩे की पुष्टि हुई है। वन विभाग स्नो लेपर्ड को सरंक्षित रखने के लिए कई अभियान चला रहा है।