प्रदेश में 98 सड़कें बंद, 107 ट्रांसफार्मर ठप और 37 पेयजल योजनाएं प्रभावित; सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश
शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। बारिश के साथ भूस्खलन और सड़कें अवरुद्ध होने का सिलसिला भी शुरू हो गया है। सोमवार सुबह तक राज्य में 98 सड़कें बंद थीं, जबकि 107 बिजली ट्रांसफार्मर और 37 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं।

मौसम विभाग के मुताबिक छह सितंबर तक प्रदेश में मौसम पूरी तरह साफ होने की संभावना नहीं है। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों और सफर करने वाले यात्रियों को अगले कुछ दिन विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
चार दिन इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने अलग-अलग दिनों के लिए कई जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।
- 31 अगस्त: कांगड़ा, मंडी और सिरमौर
- 1 सितंबर: बिलासपुर, चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर
- 2 सितंबर: बिलासपुर, कांगड़ा, सोलन और सिरमौर
- 3 सितंबर: सिरमौर
- 4 से 6 सितंबर: भारी बारिश का कोई अलर्ट नहीं, लेकिन कुछ क्षेत्रों में बारिश जारी रह सकती है।
इस दौरान संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक सड़क अवरुद्ध होने की आशंका बनी रहेगी।
मंडी में सबसे ज्यादा सड़कें बंद
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार सोमवार सुबह तक प्रदेश में कुल 98 सड़कें यातायात के लिए बंद थीं। इनमें सबसे अधिक नुकसान मंडी जिले में हुआ है।
जिलेवार स्थिति इस प्रकार है:
- मंडी: 43 सड़कें
- कुल्लू: 16 सड़कें
- चंबा: 15 सड़कें
- कांगड़ा: 7 सड़कें
- अन्य जिलों में भी बारिश और भूस्खलन से सड़कें प्रभावित हैं।
मंडी में बारिश के कारण बिजली व्यवस्था पर भी असर पड़ा है। जिले में 89 बिजली ट्रांसफार्मर बंद बताए गए हैं। वहीं हमीरपुर में 37 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
24 घंटे में कई इलाकों में जमकर बरसे बादल
पिछले 24 घंटे के दौरान हिमाचल के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। कांगड़ा में सबसे अधिक 70.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
प्रमुख बारिश के आंकड़े:
- कांगड़ा – 70.4 मिमी
- बिलासपुर के मलराओं – 70.0 मिमी
- मंडी के जोगिंदरनगर – 70.0 मिमी
- सिरमौर के धौलाकुआं – 66.0 मिमी
- बिलासपुर के ब्राह्मणी – 62.2 मिमी
- मंडी के मुरारी देवी – 61.4 मिमी
- बिलासपुर की नैना देवी – 60.8 मिमी
- शिमला – 59.8 मिमी
- ऊना के रायपुर मैदान – 48.4 मिमी
- पांवटा साहिब – 45.4 मिमी
- शिमला के शिलारू – 45.2 मिमी
- नाहन – 40.4 मिमी
राजधानी शिमला में रविवार शाम हुई तेज बारिश के बाद पेड़ गिरने और वाहनों पर मलबा आने की घटनाएं भी सामने आईं। हालांकि इन घटनाओं में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।
कालका-शिमला हेरिटेज रेल लाइन पर दूसरे दिन भी सेवा बंद
बारिश का असर ऐतिहासिक कालका-शिमला हेरिटेज रेल लाइन पर भी पड़ा है। ट्रैक के नीचे मिट्टी धंसने के कारण सोमवार को लगातार दूसरे दिन इस मार्ग पर रेल सेवाएं नहीं चल सकीं। सोलन जिले में रेल ट्रैक के एक पुल के नीचे मिट्टी धंसने के बाद रेलवे ने आगामी आदेश तक ट्रेन संचालन रोक दिया है। इससे कालका-शिमला रेल मार्ग से सफर करने वाले पर्यटकों और यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
मानसून में अब तक 253 लोगों की मौत
हिमाचल में इस मानसून सीजन में बारिश और उससे जुड़ी घटनाएं लगातार जानलेवा साबित हुई हैं। अब तक प्रदेश में 253 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 462 लोग घायल हुए हैं। एक व्यक्ति अभी भी लापता है।
मृतकों में:
- 149 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई।
- 104 लोगों की जान भूस्खलन, अचानक बाढ़, बहने, फिसलने, पहाड़ी से गिरने और बारिश से जुड़ी अन्य घटनाओं में गई। प्राकृतिक आपदाओं के कारण 451 मवेशियों की भी मौत हुई है।
1,184 करोड़ रुपये की संपत्ति को नुकसान
बारिश और प्राकृतिक आपदाओं ने प्रदेश के बुनियादी ढांचे को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। अब तक 102 मकान पूरी तरह और 434 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। सरकारी आकलन के अनुसार मानसून सीजन में प्रदेश को करीब 1,184 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हो चुका है। इसमें अकेले लोक निर्माण विभाग को करीब 897 करोड़ रुपये का नुकसान शामिल है।
सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश, फिर भी बढ़ा खतरा
दिलचस्प बात यह है कि इस मानसून सीजन में अब तक हिमाचल प्रदेश में सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश हुई है। इसके बावजूद मानसून के दोबारा सक्रिय होने से अगले कुछ दिन पहाड़ी क्षेत्रों के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं।







