शिमला। हिमाचल प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विधानसभा में बड़ा बयान दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के सभी पात्र सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों के प्रति संवेदनशील है और उनके लंबित वित्तीय लाभों का भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार सरकार अब तक कर्मचारियों और पेंशनरों को करीब 2,229 करोड़ रुपये के लंबित वेतन, पेंशन और अन्य वित्तीय एरियर का भुगतान कर चुकी है।

विधानसभा में OPS और पेंशन पर क्या बोले CM सुक्खू?
वीरवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान करसोग के विधायक दीपराज के पेंशनरों से जुड़े मूल सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने सरकार की ओर से किए जा रहे वित्तीय भुगतानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हिमाचल में करीब 1.90 लाख पेंशनर और पारिवारिक पेंशनर हैं। सरकार की ओर से पेंशनरों को हर महीने की पहली तारीख को पेंशन दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की कठिन आर्थिक स्थिति के बावजूद सरकार अपनी वित्तीय क्षमता के अनुसार कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित लाभों का भुगतान कर रही है।
बिजली बोर्ड और HRTC कर्मचारियों के OPS पर भी बड़ा बयान
बिजली बोर्ड और एचआरटीसी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिए जाने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने OPS लागू करने का फैसला सियासी लाभ के लिए नहीं, बल्कि कर्मचारियों के भविष्य और बुढ़ापे को सुरक्षित करने के उद्देश्य से लिया था। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन योजना लागू करना सरकार के पहले कैबिनेट फैसलों में शामिल था। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि OPS से जुड़े यदि कुछ पात्र मामले अभी लंबित हैं तो उन्हें भी योजना का लाभ दिया जाएगा।
NPS से OPS में आने वाले कर्मचारियों के मामलों पर भी नजर
डॉक्टर जनक राज के अनुपूरक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने उन कर्मचारियों का भी उल्लेख किया, जो पहले नई पेंशन व्यवस्था में थे और OPS के लिए कुछ राशि जमा कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सरकार सभी सरकारी कर्मचारियों के प्रति संवेदनशील है और पात्र कर्मचारियों के लंबित मामलों को भी देखा जाएगा।
आर्थिक संकट के लिए केंद्र की नीतियों को बताया जिम्मेदार
मुख्यमंत्री ने लंबित भुगतान में देरी के पीछे प्रदेश की आर्थिक स्थिति का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान (RDG) में कटौती का भी राज्य की वित्तीय स्थिति पर असर पड़ा है।मुख्यमंत्री के अनुसार पूर्व भाजपा सरकार के पांच साल के कार्यकाल में हिमाचल को करीब 47 हजार करोड़ रुपये RDG के रूप में मिले थे, जबकि वर्तमान सरकार को अब तक करीब 17 हजार करोड़ रुपये ही मिले हैं। उनका कहना था कि RDG में कमी के कारण राज्य पर वित्तीय दबाव बढ़ा है।
आपदा में प्रदेश ने अपने बजट से खर्च किए 1,500 करोड़
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के दौरान राज्य सरकार ने अपने बजट से करीब 1,500 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र से आपदा के दौरान अपेक्षित मदद मिलती, प्रधानमंत्री की ओर से घोषित 1,500 करोड़ रुपये की सहायता मिलती और RDG में कटौती नहीं होती तो सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के अन्य लंबित एरियर का भी भुगतान कर सकती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के समय सरकार दिल्ली से सहायता का इंतजार नहीं कर सकती थी। हिमाचल ने दो बड़ी आपदाओं का सामना किया और राज्य सरकार ने अपने स्तर पर राहत एवं पुनर्निर्माण का काम आगे बढ़ाया।
जयराम ठाकुर ने सरकार के कर्मचारी हितैषी होने पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री के जवाब के बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने अनुपूरक सवाल पूछते हुए सरकार के कर्मचारी हितैषी होने के दावे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में कर्मचारियों और पेंशनरों के हित में काम कर रही है तो प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कर्मचारी और पेंशनर धरने और प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं। जयराम ठाकुर ने विशेष रूप से बिजली बोर्ड कर्मचारियों के OPS को लेकर किए जा रहे प्रदर्शनों का जिक्र किया और पूछा कि यदि पुरानी पेंशन योजना लागू हो चुकी है तो कर्मचारी इसके लिए आंदोलन क्यों कर रहे हैं।
आपदा की राशि को वेतन से जोड़ने पर भी सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने RDG को लेकर मुख्यमंत्री के तर्क पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि RDG बंद होने का यह पहला साल है और इससे पहले तीन साल तक सरकार को यह राशि मिलती रही। उन्होंने सवाल किया कि यदि वित्तीय स्थिति इतनी चुनौतीपूर्ण थी तो पहले तीन वर्षों में कर्मचारियों की देनदारियों का भुगतान क्यों नहीं किया गया। जयराम ठाकुर ने आपदा के लिए मिलने वाली केंद्रीय सहायता को वेतन और एरियर के भुगतान से जोड़ने पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि आपदा के लिए मिलने वाला पैसा प्रभावित लोगों और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए होता है।
CM बोले- कर्मचारियों को प्रदर्शन का अधिकार
जयराम ठाकुर के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि लोकतंत्र में कर्मचारियों को धरना और प्रदर्शन करने का अधिकार है। उन्होंने प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों की बात सुनने की बात कही और कहा कि सरकार उनकी समस्याओं पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री ने पूर्व भाजपा सरकार पर छठे वेतन आयोग के भुगतान को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उस समय करीब 50 हजार रुपये का भुगतान किया गया था और बाकी भुगतान चुनाव के बाद करने की बात कही गई थी।
76,700 करोड़ के कर्ज का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार प्रदेश पर करीब 76,700 करोड़ रुपये का कर्ज छोड़कर गई थी। इसके बावजूद वर्तमान सरकार आर्थिक चुनौतियों के बीच कर्मचारियों और पेंशनरों के हित में लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार चुनाव को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि जनता की सेवा के उद्देश्य से काम कर रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक वर्तमान सरकार के कार्यकाल को तीन साल आठ महीने 23 दिन हो चुके हैं और आने वाले समय में व्यवस्था में और सुधार किया जाएगा।








