राज्य निर्वाचन आयोग के फैसले के बाद उपायुक्तों ने जारी की अधिसूचना
शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों का बिगुल बज चुका है। शहरी निकायों और पंचायतों में आरक्षण को लेकर रोस्टर जारी हो गए हैं। ऐसे में चुनाव आयोग ने भी चुनावों को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमेंं साफ किया गया है कि अतिक्रमण करने वाले उम्मीदवार को चुनाव लडऩे से रोका जाएगा। राज्य निर्वाचन आयोग का यह बड़ा फैसला है।

हिमाचल प्रदेश में अतिक्रमण करने वाले व्यक्तियों के चुनाव लडऩे पर रोक लगाने को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा निर्णय लिया है। आयोग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार जो व्यक्ति हिमाचल प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1994 की धारा 16(1) (ग) के तहत भूमि पर अतिक्रमण कर चुके हैं। यदि उन्होंने उसके नियमितीकरण के लिए आवेदन किया हो, उन्हें चुनाव लडऩे के लिए अयोग्य माना जाएगा। यह निर्देश राज्य के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों (नगर पालिकाएं/पंचायतें) सह-उपायुक्तों को जारी किए गए हैं, ताकि वे ऐसे मामलों में स्पष्ट रूप से निर्णय ले सकें। आयोग ने यह फैसला हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों को ध्यान में रखते हुए लिया है।
उम्मीदवारों की पात्रता को लेकर सख्ती बढऩे की संभावना
इसके साथ ही आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह अयोग्यता केवल नगर निकाय चुनावों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों पर भी समान रूप से लागू होगी। पंचायती राज अधिनियम की धारा 122 (1) के तहत भी ऐसे मामलों में उम्मीदवारों को अयोग्य ठहराया जाएगा। इस फैसले के बाद आगामी नगर निकाय और पंचायत चुनावों में उम्मीदवारों की पात्रता को लेकर सख्ती बढऩे की संभावना है।







