शिमला। हिमाचल प्रदेश में रोमांच के शौकीनों के लिए एक बड़ी खबर है। अब हॉट एयर बैलूनिंग का रोमांच सिर्फ खूबसूरत नज़ारों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरी तरह कानूनी और सुरक्षित दायरे में किया जा सकेगा। पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग ने इस साहसिक गतिविधि के लिए नियमों का मसौदा तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही राज्य सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
नए नियम लागू होते ही प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर यह खेल पूरी वैधता के साथ संचालित होगा। इससे न केवल रोमांचक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी, बल्कि रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मज़बूती मिलेगी।
कुल्लू-मनाली में पिछले दो दशकों से हॉट एयर बैलूनिंग सैलानियों को आसमान से प्रकृति की गोद में झांकने का मौका देती रही है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक यहां ऊंचाई से बर्फीली चोटियों और हरे-भरे घाटियों का नज़ारा देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। अब लाहुल घाटी, खजियार और सिस्सू जैसे क्षेत्रों में भी इस खेल की लोकप्रियता बढ़ रही है।
अब तक इस गतिविधि के लिए कोई कानूनी ढांचा नहीं था। कुछ वर्ष पहले अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबंधित खेल संस्थान ने सुरक्षा मानकों को लेकर संचालकों को दिशा-निर्देश दिए थे। इसके बाद सरकार और संचालकों के बीच कई दौर की बैठकें हुईं, जिनसे नियमों की प्रक्रिया शुरू हो सकी।
राज्य पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन विभाग के निदेशक विवेक भाटिया ने बताया कि ये नियम प्रदेश में साहसिक पर्यटन को एक नई पहचान देंगे। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के अनुसार, 1000 फीट या उससे अधिक ऊंचाई पर बैलून उड़ाने के लिए विशेष अनुमति जरूरी होती है। चूंकि अब तक हिमाचल में बैलूनिंग इन मानकों से बाहर होती रही है, इसलिए केंद्र ने पहले प्रस्ताव वापस भेज दिया था। अब राज्य खुद अपना वैधानिक ढांचा तैयार कर रहा है।