हिमाचल प्रदेश के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के अंतर्गत समग्र शिक्षा अभियान का विस्तृत बजट 2 मई 2025 को अनुमोदित हो चुका है। समग्र अब तक स्कूलों को एसएसए ग्रांट्स नहीं दे पाया हैं। सत्र 2025-26 के लिए राज्य सरकार ने कुल 853.51 करोड़ का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। केंद्र स्कूल शिक्षा विभाग ने इस पर 780.25 करोड़ की राशि स्वीकृत करने की अनुशंसा दी है। यह बजट 12 प्रमुख घटकों में बांटा गया है।
जिनमें शिक्षा की गुणवत्ता सुधार हेतु लगभग 388.93 करोड़ बजट तय किया गया है। कौशल शिक्षा के लिए 150.38 करोड़, शिक्षक प्रशिक्षण के लिए 38.93 करोड़, आरटीई एंटाइटलमेंट्स के लिए 38.51 करोड़, कार्यक्रम प्रबंधन के लिए 37.15 करोड़ तथा शिक्षकों को आर्थिक सहायता देने के लिए 75.70 करोड़, एक्सेस एंड रिटेंशन मद के अंतर्गत 12.88 करोड़, लिंग समता के लिए 16.78 करोड़, योजना की मॉनिटरिंग के लिए 6.23 करोड़ तथा खेल एवं शारीरिक शिक्षा के लिए 13.79 करोड़, समावेशी शिक्षा के लिए 4.95 करोड़ स्वीकृत हुए हैं। बजट का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में उपयोग होगा। मगर स्कूलों को देय अनुदान अब तक नहीं मिले हैं। राज्य के स्कूलों को इस वर्ष समग्र शिक्षा अभियान की ग्रांट्स आज तक प्राप्त नहीं हुई हैं जिससे फंड्स की किल्लत आ रही है।
राजकीय प्रशिक्षित कला स्नातक संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कौशल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विजय बरवाल और प्रदेश महासचिव विजय हीर ने कहा कि यदि यह राशि समयबद्ध तरीके से रिलीज नहीं हुई तो बिजली और इंटरनेट बिल देना भी मुश्किल हो जाएगा और वार्षिक समारोह के आयोजन में भी फंड्स की कमी पेश आएगी।
स्कूल उधारी लेकर कर रहे खर्च
अधिकतम विद्यालयों में कंपोजिट ग्रांट, मरम्मत ग्रांट, एसएमसी ट्रेनिंग और समुदाय जागरुकता ग्रांट, खेल अनुदान तथा इको क्लब के लिए धनराशि की तत्काल आवश्यकता है। कई विद्यालयों ने अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उधारी पर खर्च भी किया है। जिसे तुरंत चुकाना जरूरी है। उन्होंने केंद्र से स्वीकृत राशि को शीघ्र जारी करने के लिए कार्यवाही की जाए। इसी संदर्भ में संघ ने राज्य परियोजना निदेशक को औपचारिक मांग पत्र भेजकर सभी स्कूलों को लंबित अनुदान राशि तुरंत जारी करने की मांग उठाई है।