हिमाचल दस्तक। शिमला
पहाड़ों की रानी शिमला में पर्यटन कारोबार मंदा पड़ गया है। हिमाचल प्रदेश में जमकर मेघ बरस रहे है। शिमला में भी मानसून ने जमकर कहर बरपाया है। तबाही के मंजर देख सैलानियों ने पहाड़ों का रुख करना छोड़ दिया है। शिमला में पर्यटकों की संख्या में कमी आई है। जुलाई माह में पर्यटकों से गुलजार रहने वाले पर्यटक स्थल सुने पड़ गए हैं।
जिससे पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों की मुश्किल बढ़ गई है। जून माह में लाखों पर्यटकों ने शिमला का रुख किया। होटलों की ऑक्यूपेंसी 90 से 95 फीसदी तक पहुंच रही थी। लेकिन मानसून की एंट्री के बाद पर्यटन कारोबार पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा गए। होटलों की ऑक्यूपेंसी 80 फीसदी से घटकर 40 फीसदी रह गई है।
वीकेंड पर भी शिमला में उम्मीदों से कम पर्यटक पहुंचे। रिज मैदान, मॉल रोड और लक्कड़ बाजार में इक्का-दुक्का सैलानी चहलकदमी करते हुए दिखाई दिए। मानसून की दस्तक से पहले शिमला के पर्यटक स्थल सैलानियों के जैम पैक हो गए थे। मई माह के अंतिम सप्ताह और जून माह के पहले दो हफ्तों में रिकॉर्ड तोड़ पर्यटक शिमला में पहुंचे। शहर की सडक़ों पर रोजाना जाम लग रहा था। लेकिन अब शहर की सडक़ों पर सन्नाटा और पर्यटन स्थल सुने पड़े हैं। होटलों की ऑक्यूपेंसी 80 फीसदी से घटकर 40 फीसदी तक रह गई है। जिससे टैक्सी चालकों, होटल संचालकों और ढाबा संचालकों और पर्यटक से जुड़े हर व्यक्ति का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
शिमला टूर्स एंड ट्रैवल्स एसोसिएशन के महासचिव मनु सूद ने बताया कि मौसम का असर कारोबार पर पड़ रहा है। मानसून की दस्तक के बाद शिमला में पर्यटन कारोबार मंदा पड़ गया है। वीकेंड के दिनों में भी बहुत कम पर्यटक शिमला का रुख कर है। होटलों की ऑक्यूपेंसी में 50 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है। मौसम का पूर्वानुमान देख कर ही सैलानी पहाड़ों का रुख कर रहे है।
उन्होंने कहा कि जुलाई माह के अंतिम सप्ताह तक शिमला सैलानियों से गुलजार रहता था। लेकिन अब कारोबार पर मौसम की मार पड़ रही है। पिछले दो साल भी मानसून ने गहरे जख्म दिए और इस वर्ष भी कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि शिमला पर्यटकों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
सिटी रिपोर्टर








