शिमला। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मंडी औऱ चंबा में बाढ़ के बीच भारी मात्रा में बहती लकड़ियों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है और सुक्खू सरकार से जवाब मांगा है। गुरुवार को इस मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया।
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश में बाढ़ के पानी में तैरती लकड़ियों के वीडियो का संज्ञान लेते हुए कहा कि हिमालयी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध पेड़ों की कटाई हो रही है। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के.विनोद चंद्रन की पीठ ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि हमने उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पंजाब में अभूतपूर्व भूस्खलन और बाढ़ देखी है। मीडिया रिपोर्टों से भी यह तथ्य सामने आया है कि बाढ़ में भारी संख्या में लकड़ी के लट्ठे बहते देखे गए। प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट है कि पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध कटान हो रहा है।
शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी हिमालयी क्षेत्र में पर्यावरणीय क्षरण के मुद्दे पर दायर एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान की।
ये है पूरा मामला
दरअसल, हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के सैंज में 25 जून को बादल फटने के बाद भारी मात्रा में लकड़ियां नदी में बहती नजर आई थी। इस दौरान सैलाब में बड़े बड़े पेड़ों के तने और बड़ी सारी लकड़ी नजर आई। यहां तक कि आगे मंडी के पंडोह में ब्यास नदी पर बना सारा डैम लकड़ी से अट गया। इस मामले के वीडियो और फोटो काफी वायरल हुए तो हंगामा मच गया था।
हालांकि, वन विभाग के उपाध्यक्ष कहर सिंह खाची ने कहा कि यह लकड़ी जंगल का कचरा है जो कि पानी के साथ बहकर आया और कोई अवैध कटान नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया था कि अवैध कटान नहीं हुआ है। हालांकि, सुक्खू सरकार ने मामले की जांच अब सीआईडी को सौंपी है।