हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र का आज दूसरा दिन है। विधानसभा का शीतकालीन सत्र 26 नवंबर से 5 दिसंबर तक धर्मशाला के तपोवन में आयोजित किया गया है। इस शीतकालीन सत्र में कुल 8 बैठकें होगी। 28 नवंबर और 4 दिसंबर को गैर-सरकारी सदस्य कार्य के लिए निर्धारित किया गया है। विधानसभा के पहले दिन की कार्यवाही में पंचायती राज चुनावों का मुद्दा खूब गरमाया।
विपक्ष ने सरकार पर हार के डर से चुनाव न होने देने का आरोप लगाया। वहीं, सत्ता पक्ष ने प्रदेश में खराब सड़कों के कारण पंचायतों चुनावों में देरी का हवाला दिया। इसके अलावा कांग्रेस सरकार के तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के जश्न पर भी विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जाहिर की। आज की कार्यवाही सुबह 11 बजे से शुरू हुई।
पंचायती राज चुनाव टालने पर विपक्ष का वॉकआउट
हिमाचल प्रदेश विधानसभा शीतकालीन सत्र में सदन में नियम 67 के तहत लाए गए स्थगन प्रस्ताव पर आज जोरदार हंगामा हुआ। पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव टालने के मुद्दे पर विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट किया। सदन से बाहर आकर विपक्ष ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के जवाबों को भ्रामक बताया और सरकार पर चुनाव से भागने का आरोप लगाया।
विपिन सिंह परमार ने सदन में उठाया उताराला सड़क मार्घ का मुद्दा
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार ने होली उतराला सड़क मार्ग का मामला उठाया। विपिन परमार ने कहा कि, “इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। ये मार्ग दो जिलों को जोड़ता है। रोड के बनने से दूरी कम होगी। समय की बचत होगी। इस मार्ग के बनने से टांडा और एम्स बिलासपुर पहुचने में लोगों को मदद मिलेगी।
पंचायती राज स्थगन प्रस्ताव निरस्त होने पर सदन में हंगामा
हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव में देरी पर विधानसभा शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन भी सदन में जमकर हंगामा हुआ। इस बीच सीतकालीन सत्र के दूसरे दिन पंचायती राज स्थगन प्रस्ताव निरस्त हने पर विपक्ष ने सदन में जमकर नारेबाजी की है।
CM सुक्खू ने बताया कब होंगे पंचायत चुनाव?
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू नियम 67 के तहत काम रोको प्रस्ताव की चर्चा के उत्तर में कहा कि, 17 लोगों ने विचार रखे, जो प्रस्ताव लाए हैं। कम संसाधनों के बावजूद सरकार ने राहत देने का काम किया। सरकार संवेदनशीलता से काम करती है। डिजास्टर एक्ट हटाते ही पंचायत चुनाव होंगे। नई पंचायतें बनाई जाएगी। आज के बाद प्रदेश में पूरी तरह से आपदा एक्ट लागू होगा। उसके बाद ही पंचायत चुनाव होंगे।
चुनाव टालने का प्रयास कर लोकतंत्र की हत्या की जा रही: सतपाल सत्ती
ऊना से भाजपा विधायक सतपाल सत्ती ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि, “सरकार फेल हो गई है। पंचायत चुनाव समय पर होने चाहिए। जब सड़कें नहीं थीं, तब भी चुनाव होते थे। पंचायत चुनाव समय पर होने चाहिए। लोकतंत्र में चुनावों का समय होने पर ही पर्व के रूप में मनाते हैं। तीन स्तरीय प्रणाली के तहत पंचायत के चुनाव होते हैं। इसमें दोराय नहीं कि हिमाचल में बड़ी प्राकृतिक आपदा आई है। चुनाव टालने का प्रयास करके लोकतंत्र की हत्या की जा रही है। सड़कें, पानी और बिजली अब तक बहाल नहीं हुई है, तो सरकार में बैठने का कोई लाभ नहीं है। ऐसे में बहाने बनाकर चुनाव रोकने का कतई प्रयास नहीं करनी चाइए। छह महीने पहले आरक्षण रोस्टर जारी करना अनिवार्य है। पंचायत चुनाव समय पर होने चाइए।
पंचायत चुनाव में देरी पर सदन में हंगामा, विपक्ष के सवालों पर सरकार ने बताई ये वजह?
हिमाचल विधानसभा के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही के दौरान दून सोलन के विधायक राम कुमार ने कहा कि आपदा से सारे हिमाचल के साथ-साथ उनका विधानसभा क्षेत्र भी प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से जमीनी स्तर पर आपदा राहत को पहुंचाने का काम किया जा रहा है। ऐसे में अभी राज्य में पंचायत चुनावों को लेकर तैयारी नहीं की जा सकी है। नेता प्रतिपक्ष ने पहले दिन से रिव्यू करने की बात कही थी।
वही, चौपाल के विधायक बलबीर वर्मा ने कहा कि हिमाचल में पंचायत चुनाव कभी भी आगे नहीं सरके है। कोविड-19 के मुश्किल दौर में भी चुनाव हुए हैं। पंचायतों के पुनर्गठन को लेकर प्रस्ताव मंगवा लिए, जबकि बाद में आनाकानी की गई। उन्होंने कहा कि सरकार राज्य चुनाव आयोग के साथ झगड़ा करने की कोशिश कर रही है। सरकार इस समय चुनाव से बचने की कोशिश कर रही है। तीन महीने आरक्षण रोस्टर निकालने को कहा था, उस टाइम ही आपदा एक्ट लागू किया गया था।
इसके जवाब में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि पंचायत चुनाव को लेकर बात नहीं हो पा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के सदस्य ही बताए कि क्या राज्य में आपदा है या नहीं है? नेता प्रतिपक्ष मात्र थुनाग में ही आपदा की बात करते हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों को भूल रहे हैं। प्रदेश में 1867 घर पूरी तरह से, 8 हजार आशिंक रूप से, 700 से ज्यादा सड़कें डैमेज हुई, जिन्हें बहाल किया गया है।
साथ ही काफी भूमि को नुकसान हुआ है। आपदा राहत व एफसीए-1980 को लेकर बात करने पर विपक्ष के विधायक बाहर भाग रहे हैं। नेशनल डिजास्टर एक्ट-2005 में कांग्रेस सरकार ने बनाया है, जिसके तहत ही बजट मिल रहा है। राजस्व मंत्री ने कहा आपदा की स्थिति बनी हुई है, सड़कें अभी भी पूरी दरूस्त नहीं हुई।
राज्य के सभी अधिकारी-कर्मचारी आपदा राहत कार्य में व्यस्त है। 80-80 लाख के तंबू पूर्व सरकार ने खर्च कर किए, जबकि 18 करोड़ का तंबू इनविस्टर मीट के लिए लगाया गया, जिसमें राज्य में इन्वेस्ट नहीं आई।