सोलन। कुम्हारहट्टी में NH-5 के किनारे स्थित स्कूल के पास रोज़ाना एक खतरनाक दृश्य दोहराया जाता है…सैकड़ों वाहनों की तेज रफ्तार, भारी ट्रैफिक का दबाव और इसी बीच सड़क पार करते करीब 300 मासूम बच्चे। यह तस्वीर केवल लापरवाही की नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता की भी गवाही देती है।
हर सुबह बच्चे स्कूल पहुंचने के लिए सड़क पार करते हैं और हर दोपहर घर लौटते वक्त वही जोखिम दोबारा उठाते हैं। तेज रफ्तार वाहनों के बीच फुटपाथ, ज़ेबरा क्रॉसिंग, स्पीड ब्रेकर, चेतावनी संकेत कुछ भी नहीं जो सुरक्षा का एहसास दिला सके। स्थिति इतनी भयावह है कि अभिभावक हर दिन भय के साए में अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं। सड़क सुरक्षा से जुड़े नियम किताबों में हैं, लेकिन जमीनी हकीकत उससे बिलकुल उलट।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन अब तक खामोश क्यों है? स्थानीय लोग कई बार अधिकारियों को अवगत करा चुके हैं, सोशल मीडिया पर मुद्दा उठ चुका है, लेकिन कार्रवाई शून्य। प्रशासन की चुप्पी किसी अनहोनी का इंतज़ार करती दिख रही है।
NH-5 प्रदेश की सबसे व्यस्त सड़कों में से एक है। ऐसे में स्कूल के पास फुट-ओवर ब्रिज, स्पीड-कैलिब्रेशन, ट्रैफिक कंट्रोल कर्मी या कम से कम सिग्नल लाइट की व्यवस्था होना अनिवार्य है। लेकिन कुम्हारहट्टी की स्थिति बताती है कि योजनाओं और प्राथमिकताओं में बच्चों की सुरक्षा कहीं खो गई है।
यह केवल एक क्षेत्र का मुद्दा नहीं यह पूरे सिस्टम की नाकामी है। जब तक प्रशासन आंखें खोलकर तत्काल कदम नहीं उठाता, तब तक हर बच्चा रोज़ मौत से मुकाबला करता रहेगा।
कुम्हारहट्टी के NH-5 पर तेज रफ्तार ट्रैफिक के बीच रोज़ाना जोखिम उठाते 300 बच्चों की सुरक्षा प्रशासनिक लापरवाही की खुली तस्वीर पेश करती है। यह स्थिति किसी दुर्घटना का नहीं, बल्कि किसी बड़े हादसे का इंतज़ार करती दिख रही है।
अब समय आ गया है कि प्रशासन कागज़ी कार्यवाही से ऊपर उठकर तुरंत ज़मीनी कदम उठाए सुरक्षा इंतज़ाम मजबूत करे, ट्रैफिक नियंत्रण लागू करे और बच्चों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित करे। बच्चों की जान से बड़ा कोई मुद्दा नहीं, और इस खतरनाक चुप्पी को अब टूटना ही होगा।