हिमाचल शिक्षक भर्ती के लिए लागू होगा जम्मू-कश्मीर मॉडल, दुर्गम क्षेेत्रों में शिक्षकों की कमी की जाएगी दूर, हर साल बनेगी नई मेरिट
शिमला। हिमाचल प्रदेश के हजारों बेरोजगार प्रशिक्षित युवाओं से जुड़ी खास खबर है। प्रदेश सरकार जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में अस्थायी शिक्षकों की भर्ती का नया मॉडल लागू करने की तैयारी कर रही है। शिक्षा विभाग को इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के बाद मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
मंजूरी मिलने पर समग्र शिक्षा अभियान के तहत एक वर्ष के लिए शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी।

प्रदेश के अनेक दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में वर्षों से शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में लंबा समय लगने के कारण कई स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे में सरकार अब एक ऐसा मॉडल अपनाने पर विचार कर रही है, जिससे खाली पदों पर तुरंत शिक्षक उपलब्ध करवाए जा सकें और बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
शिक्षा मंत्री ने कहा-जम्मू-कश्मीर में लागू यह व्यवस्था काफी सफल रही
शिक्षा मंत्री ने बताया कि जम्मू-कश्मीर में लागू यह व्यवस्था काफी सफल रही है। वहां शिक्षकों की नियुक्ति केवल एक वर्ष के लिए होती है और प्रत्येक वर्ष नई मेरिट सूची तैयार की जाती है। यदि किसी पद के लिए पहले से अधिक अंक वाला अभ्यर्थी उपलब्ध होता है तो उसे प्राथमिकता देकर नियुक्ति दी जाती है। इससे चयन प्रक्रिया प्रतिस्पर्धी बनी रहती है और योग्य अभ्यर्थियों को अवसर मिलता है।
बेरोजगार युवाओं को अनुभव और रोजगार का मिलेगा अवसर
गौर हो कि यदि यह नीति हिमाचल में लागू होती है तो इसका सबसे बड़ा लाभ उन दूरस्थ स्कूलों को मिलेगा जहां लंबे समय से नियमित शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। दूसरी ओर, प्रशिक्षित बेरोजगार युवाओं को भी अनुभव और रोजगार का अवसर मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर शिक्षकों की कमी का असर कम होगा।
शिक्षक भर्ती व्यवस्था में बड़ा बदलाव
विभागीय सूत्रों की माने तो यह व्यवस्था तत्काल राहत तो दे सकती है, लेकिन एक वर्ष की नियुक्ति से शिक्षकों में नौकरी की स्थिरता नहीं रहेगी। हर साल नई मेरिट बनने से पहले से कार्यरत शिक्षकों के सामने अनिश्चितता बनी रह सकती है। शिक्षक संगठनों की ओर से नियमित भर्ती को प्राथमिकता देने की मांग भी उठ सकती है। वहीं सरकार का तर्क है कि यह व्यवस्था केवल उन क्षेत्रों के लिए होगी जहां नियमित नियुक्तियां समय पर नहीं हो पातीं और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। अब सबकी नजर शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए जाने वाले प्रस्ताव और उस पर कैबिनेट के फैसले पर रहेगी। यदि मंत्रिमंडल इस नीति को मंजूरी देता है तो हिमाचल की शिक्षक भर्ती व्यवस्था में यह एक बड़ा बदलाव माना जाएगा।
100 अंकों की मेरिट से होगा चयन
प्रस्ताव के अनुसार चयन पूरी तरह मेरिट आधारित होगा। इसके लिए 100 अंकों का मूल्यांकन मानदंड अपनाया जाएगा। स्नातक, स्नातकोत्तर, एमफिल, पीएचडी जैसी शैक्षणिक योग्यताओं के साथ-साथ शिक्षण अनुभव को भी अंक दिए जाएंगे। अंतिम मेरिट सूची के आधार पर नियुक्तियां होंगी।
25 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेगा मानदेय
जम्मू-कश्मीर मॉडल के अनुसार चयनित शिक्षकों को 25,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। हिमाचल में भी इसी तर्ज पर मानदेय तय किए जाने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अंतिम राशि का निर्णय नीति और वित्तीय स्वीकृति के बाद होगा।
आयु सीमा में मिल सकती है राहत
जम्मू-कश्मीर में इस भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष निर्धारित है, लेकिन हिमाचल सरकार स्थानीय परिस्थितियों और अभ्यर्थियों की मांग को देखते हुए इसमें संशोधन कर सकती है। शिक्षा विभाग इस पहलू को भी प्रस्ताव में शामिल करेगा।







